लेटी परिक्रमा और पदयात्रा कर इच्छा मृत्यु मांगने निकले किसान

सतना जबलपुर दर्पण । जिले के उचेहरा में पावर ग्रिड कंपनी से खेत में लगाए टावर का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों किसान मंगलवार को लेटी परिक्रमा और पदयात्रा निकालकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लगभग 42 डिग्री के तापमान पर सैकडों किसान हाथ में पोस्टर बैनर लेकर नागौद थाना क्षेत्र के पौड़ी तिराहा से लेटी परिक्रमा करते हुए निकले। महिला कृषक लेट कर परिक्रमा लगाते हुए सतना कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुईं। किसानों का कहना है कि उन्हें न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर मुआवजे का भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर शासन-प्रशासन और सरकार ये करने में नाकाम है तो राष्ट्रपति हम सभी किसानों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दें। कोर्ट के आदेश के बाद भी बिना मुआवजा लगाए टावर बता दें कि सितपुरा स्थित पावर ग्रिड प्लांट ने तमाम गांव में टावर लाइन का काम किया है। जानकारी के अनुसार कई किसानों का मुआवजा भुगतान किए बिना ही उनके खेतों में हाइराइज टावर गाड़ दिए गए, जिसके बाद किसान न्यायालय पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया है कि न्यायालय से जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कंपनी ने अपना काम कर लिया। जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जमकर पावर ग्रिड कंपनी की तरफदारी की और किसान असहाय बना रहा। वहीं अब किसानों ने पदयात्रा निकाली है। ये यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंचेगी जहां पर अपनी मांगों का ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम सतना कलेक्टर को देगी। किसानों के समर्थन में उतरे आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक चिलचिलाती धूप में पोंड़ी तिराहा से शुरू हुई लेटी परिक्रमा और पदयात्रा को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ सदाचारी तोमर ने भी अपना समर्थन दिया है। वो इस पैदल यात्रा में शामिल हैं। उनका मानना है कि किसानों के साथ पावर ग्रिड ने अन्याय किया है। डॉ सदाचारी ने कहा कि जिला प्रशासन को इस मामले में उचित कदम उठाने की आवश्यकता थी। मगर ऐसा नहीं हुआ। अभी भी समय है अगर सरकार किसान हितैषी है तो उनके मुआवजे का भुगतान कर इस बात का प्रमाण दे सकती है। दो महीने टावर में चढ़े रहे थे रामनाथ पावर ग्रिड के खिलाफ आंदोलित हुए किसानों में अतरबेदिया के आदिवासी किसान रामनाथ कोल भी शामिल हैं।
ज्ञात हो कि रामनाथ और उनके सहयोगी किसान विगत वर्षों में दो महीने तक पावर ग्रिड के टावर में चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा भुगतान करने का आशासन दिया गया था। लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो पाया रामनाथ कोल भी लेटी परिक्रमा कर कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हो चुके हैं। लगभग 35 किलोमीटर की ये यात्रा पूरी करने के बाद किसान कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे और अपना आवेदन कलेक्टर के माध्यम से देंगे।
किसानों की 3 प्रमुख मांगें-उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मुआवजा आदेश का तत्काल पालन किया जाए।
प्रशासन किसानों की जमीनों पर हुए नुकसान का सत्यापन कर मुआवजा दिलाए।
अगर कार्रवाई संभव नहीं है, तो राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।



