बरगंवा में नगर निगम की बेशकीमती जमीनों की ‘बंदरबांट’, अधिकारियों की सांठगांठ से सज रहा अवैध कब्जों का बाजार

कटनी जबलपुर दर्पण । शहर के पॉश इलाके में शामिल बरगंवा में मुख्य मार्ग पर नगर निगम की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीनों को खुर्द-बुर्द करने का बड़ा खेल सामने आया है। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरे खेल में निगम के ही कुछ रसूखदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जो कथित तौर पर नगर निगम कमिश्नर की आंखों में धूल झोंककर भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं।
सुलभ कॉम्प्लेक्स के बगल में ‘टपरा’ की आड़ में पक्का खेल
बरगंवा मेन रोड पर सुलभ कॉम्प्लेक्स के ठीक बाजू में लगभग 4 से 5 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन पर टपरा खड़ा कर दिया गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह सिर्फ एक शुरुआत है। टपरे की आड़ में दुकानों के भीतर धीरे-धीरे पक्का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। निगम के मैदानी अमले की चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि बिना ‘ऊपर’ की सेटिंग के इतना बड़ा कब्जा संभव नहीं है। जबकि इन्हें हटाने का कोर्ट का आदेश है। फिर भी अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
शर्मा ऑटो डील वाली गली: कागजों की ‘जादूगरी’
अतिक्रमण का यह जाल यहीं नहीं थमा है। शर्मा ऑटो डील वाली गली में भी एक बड़ा खेल चल रहा है। आरोप है कि नगर निगम की स्वामित्व वाली जमीन को ‘नजूल’ बताकर उसके फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। सांठगांठ इतनी गहरी है कि इन फर्जी कागजों के आधार पर जमीनों की रजिस्ट्री तक हो गई है। जबकि निगम की योजना 3/17 की जमीन है।
रसूखदारों का ‘अभयदान’: एक नेता भी शामिल
इस पूरे प्रकरण में एक स्थानीय नेता का नाम भी तेजी से उभर कर सामने आ रहा है। चर्चा है कि नेताजी ने निगम की योजना 3/17 की जमीन पर प्रशासन के साथ मिलकर जमीन का बड़ा टुकड़ा अपने नाम कर लिया है और वहां धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी है। सत्ता और प्रशासन के इस गठजोड़ के आगे निगम के ईमानदार कर्मचारी भी बौने साबित हो रहे हैं।
प्रमुख बिंदु: आखिर कहां सो रहा है प्रशासन?
- कमिश्नर को अंधेरे में रखने की साजिश: क्या निगम के छोटे अधिकारी कमिश्नर को गलत जानकारी दे रहे हैं?
- राजस्व का नुकसान: करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम या अवैध कब्जों की भेंट चढ़ रही है।
- फर्जीवाड़े का सिंडिकेट: निगम की जमीन को नजूल बताकर रजिस्ट्री करने वाले इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है?



