वनमाली स्मृति समारोह: गायन-वादन ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

जबलपुर दर्पण। वनमाली सप्रे स्मृति समारोह के अंतर्गत आज शनिवार शाम को शहीद स्मारक सभागृह में शास्त्रीय संगीत अतगारी है का आयोजन किया गया, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रूपककुमार सोनी एवं डॉक्टर बलवंत हर्षे रहे।
कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति में कलकत्ता से पधारी सृजनी बनर्जी ने राग पुरिया कल्याण से सितार वादन का आरंभ किया. आपने इसमें आलाप, जोड़, झाला के साथ तीन ताल में बड़ी एवं छोटी गत प्रस्तुत की. आपने अपने कार्यक्रम का समापन मांज खमाज में एक धुन प्रस्तुत के किया। आपके साथ तबले पर मधुर संगत भोपाल से पधारे श्री रामेंद्र सोलंकी ने की, कार्यक्रम के दूसरे चरण में हैदराबाद की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मुक्ति श्री की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना से हुई। इसके बाद उन्होंने तीनताल में थाट, आमद, परन, टुकड़े आदि विभिन्न प्रकार के नृत्य प्रस्तुत किये। तेजी से तीन ताल में प्रदर्शन किया जाता है, विशेषकर गिनती, तिहाई, चक्र, पारण। इसकी रचना गुरु शमा भाटे, पंडित सुरेश तलवलकर, पंडित बिरजू महाराज, उस्ताद अल्लारखा ने की थी। फिर आपने भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन तराने की प्रस्तुति के साथ हुआ। यह आपकी शिष्या आरुषि दीक्षित एवं पुत्री अन्वी श्री के साथ संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया। आपके साथ तबले पर आयुष कुलकर्णी, पखावज पर कृष्णा सालुंके, गायन पर सुरजन खंडालकर और हारमोनियम पर पुणे के अथर्व कुलकर्णी ने संगत की, संचालन माधुरी काने टकर, मधु नागराज एवं श्रीनिवास राव द्वारा किया गया. कार्यक्रम के समापन में संयोजक प्रोफेसर अखिलेश सप्रे ने आभार प्रस्तुत किया ।



