एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतें, दूसरी ओर अपने क्षेत्र में अखंड भ्रष्टाचार पर चुप्पी

सिवनी जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश आदिवासी बहुल क्षेत्र जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया ने हाल ही में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को चेक डैम निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार की शिकायत कर जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मनरेगा के तहत बने अधिकांश चेक डैम में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। उनकी शिकायत में खास तौर पर कुरई जनपद पंचायत में 33 चेक डैम के निर्माण में अनियमितताओं का जिक्र है, जहां तकनीकी स्वीकृति के नाम पर नियमों का उल्लंघन कर काम किया गया। डेहरिया ने इस मामले में उच्च-स्तरीय समिति बनाकर जांच रिपोर्ट उनके सामने पेश करने की मांग की है, जिसकी प्रतियां पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री समेत अन्य उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
भ्रष्टाचार की मूर्ति’ या ‘न्याय की पैरोकार’ जिला पंचायत अध्यक्ष की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
यह स्थिति जिला पंचायत अध्यक्ष के “दोमुंहे” चरित्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ वह चेक डैम में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर दिख रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके स्वयं के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 15 (एससी आरक्षित) और लखनादौन, धनोरा, छपारा, घंसौर सहित अन्य जनपद पंचायतों में ग्रेवल सड़क, पुलिया, टीन शेड, पशु निर्माण, प्रीकास्ट सीमेंट कुर्सी , कुआ तालाब, हितकारी मूलक योजनाएं घोटाला जैसे कई निर्माण कार्यों में ‘अखंड भ्रष्टाचार’ चरम पर होने के आरोप लग रहे हैं।
लखनादौन, घंसौर, धनोरा , छपारा ‘अखंड भ्रष्टाचार’ का गढ़- क्या अध्यक्ष अपनी जवाबदेही से भागेंगी
लखनादौन, जो जिला पंचायत अध्यक्ष का अपना निर्वाचन क्षेत्र है, कथित तौर पर भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। स्थानीय निवासियों और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो यहां ठेकेदारों, सरपंचों और सचिवों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर हेराफेरी और गोलमाल किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत अध्यक्ष अपनी जवाबदेही से भागेंगी और अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में हो रहे इस व्यापक भ्रष्टाचार की जांच कराएंगी, या फिर भ्रष्टाचारी ठेकेदारों और अधिकारियों को संरक्षण देंगी जब से श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया निर्वाचित हुई हैं, सिवनी जिला पंचायत में भ्रष्टाचार कथित तौर पर बेलगाम हो गया है।
कई गांवों में जहां पीने का पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, वहीं अध्यक्ष के पति द्वारा कुछ चाटुकार नेताओं और साथियों के साथ मिलकर राजनीति की जा रही है, जो खुद को राज्य मंत्री समझते हैं। क्या वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुए भ्रष्टाचार की कभी जांच करवाएंगे क्या वे सरकार और प्रशासन से इसकी मांग करेंगे या फिर ऐसा ही ‘दोमुंहा’ चेहरा और दबाव की राजनीति करके अपना स्वार्थ सिद्ध करती रहेंगी
क्या होगी निष्पक्ष जांच या यह महज एक दिखावा
अब देखना यह होगा कि क्या जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत पर वाकई न्यायसंगत जांच हो पाएगी और मनरेगा के तहत हुए भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ पाएगी। या फिर यह केवल एक दिखावा साबित होगा, जबकि अपने ही गढ़ में ‘अखंड भ्रष्टाचार’ को अनदेखा कर दिया जाएगा यह स्थिति जनमानस में जिला पंचायत अध्यक्ष की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और उन्हें एक ‘भ्रष्टाचार की मूर्ति’ के रूप में चित्रित करती है। आगामी समय में और भी भ्रष्टाचार के खुलासे होने की संभावना है, जैसा कि सूत्रों का कहना है।
क्या आप इस मामले में और अधिक जानकारी या अन्य विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के बारे में जानना चाहेंगे और भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी हो तो हमारे संवाददाता से संपर्क करके आप अपनी बात रख सकते हैं



