सिवनी दर्पण

स्वामी सदानंद सरस्वती जी का दो दिवसीय सिवनी प्रवास बना धार्मिक इतिहास का स्मरणीय अध्याय

सिवनी जबलपुर दर्पण । पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी का दो दिवसीय सिवनी प्रवास जिले के धार्मिक इतिहास में एक निर्णायक एवं अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज किया जा रहा है। शंकराचार्य जी 20 जनवरी की रात्रि को संतोष सहज आश्रम, सिवनी पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं एवं गुरु-भक्तों द्वारा उनका भव्य एवं गरिमामय स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

21 जनवरी की प्रातः सिवनी विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ एवं केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह सहित अनेक श्रद्धालुजन, संतजन एवं गुरु-भक्त आश्रम पहुंचे और पूज्य शंकराचार्य जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

अपने प्रवास के दौरान शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी सीलादेही स्थित द्वारकाधीश मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजन समितियों के साथ बैठकें ले रहे हैं। उन्होंने संपूर्ण व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करते हुए आयोजन की धार्मिक शुद्धता, वैदिक विधि-विधान, अनुशासन एवं समयबद्धता को लेकर प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान किया। पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा जैसे महोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि समाज को धर्म और संस्कार से जोड़ने का माध्यम होते हैं।

मातृशक्ति की महत्वपूर्ण बैठक

21 जनवरी को प्रातः 11 बजे मातृशक्ति की विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें गीता परिवार, गीता पराभक्ति मंडल, सिंह वाहिनी मंदिर समिति सहित अन्य मातृशक्ति संगठनों की सक्रिय सहभागिता रही। बैठक में महिलाओं द्वारा आयोजन को लेकर अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।

मातृशक्ति ने आश्वासन दिया कि वे प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान भंडारा, स्वागत व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन एवं समाज में व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य पूर्ण निष्ठा और उत्साह के साथ संपन्न करेंगी।

मातृशक्ति की बैठक के पश्चात पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने धर्मोपदेश दिया। इस अवसर पर पूज्य गीता मनीषी निर्विकल्प स्वरूप जी एवं आयोजन के संयोजक ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानंद जी ने द्वारकाधीश मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए सभी श्रद्धालुओं एवं समाज के प्रत्येक वर्ग से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

पूरे कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई, जिससे सिवनी का यह प्रवास आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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