बदेरा छुई खदान पर मैहर प्रशासन की मेहरबानी
मैहर जबलपुर दर्पण । जिले के पूर्व खनिज अधिकारी का जितना गुणगान किया जाए कम है,उनका दायित्व था नियम विरुद्ध खनिज का खनन करने वालो का संरक्षण किया जाए,इसी घड़ी पर उन्होंने ग्राम बदेरा में दिलीप जैन की छुई खदान को खूब संरक्षण दिया और बताया कि जब तक मैं हु सभी नियमों को कूड़ेदान में डाल दूंगा, अवैध उत्खनन और नियम विरुद्ध कार्य करने वालो को आंच नहीं आने दूंगा, खुद नियम बना दूंगा जिसका पालन जिला संभाग तक होना तय है! मजे की बात है खनिज अधिकारी द्वारा दिए जा रहे संरक्षण में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुप्पी साध सहभागिता निभाई,प्रमाण के तौर आपको बताए कि बदेरा छुई खदान के सम्बन्ध में RTI से जानकारी चाही गई थी लेकिन विभाग ने कहा अगर खनन और पर्यावरण नियमों की जानकारी दे दी गई तो खदान संचालक का नुकसान हो जायेगा साफ तौर पर समझा जा सकता है, महीने में खदान संचालक कार्यालय आकर जो हाजिरी लगाते है हफ्ते भर में खनिज अधिकारी को खुद खदान में जाकर कार्यवाही करनी होगी भ्रष्टाचार की प्रथा न टूटे जिसे कायम रखने के लिए खनिज अधिकारी ने जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई, वही प्रथम अपील जिला कलेक्टर कार्यालय मैहर में की गई खनिज अधिकारी की बातों को संविधान मानते हुए प्रथम अपील अधिकारी ने अपने विवेक का उपयोग न करते हुए, अपीलकर्ता का पक्ष जानने का प्रयास नहीं किया, सीधे खनिज अधिकारी को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने भी कह दिया कि अगर जानकारी उपलब्ध करवाई गई तो व्यापार में क्षति होगी निश्चित अगर जानकारी उपलब्ध करवाई जाती तो अवैध उत्खनन और पर्यावरण नियमों के अनदेखी का भेद खुल जाता जिससे प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती और कार्यवाही करनी पड़ती तो महीने की सांठगांठ पर प्रभाव पड़ता जिस कारण आरटीआई अधिनियम को निजी फायदे के लिए मैहर प्रशासन जिले में निष्क्रीय कर रहा है अब यह देखना होगा कि मैहर में कब तक भ्रष्टाचार का साम्राज्य बढ़ता रहेगा,मैहर प्रशासन खासकर खनिज विभाग में बैठे अधिकारी कब तक अपने व्यापार को बचाने के लिए शासकीय नियमों के अनदेखी करते रहेंगे!



