शासकीय सेवा के टाइम निजी क्लीनिक चला रहे डॉक्टर

गोटेगांव जबलपुर दर्पण । नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के महिला चिकित्सक की मनमानी अस्पताल में नहीं रखती पैर गोटेगांव स्थानीय सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक की मनमानी चल रही है यहां पर महिला चिकित्सक अस्पताल परिसर में स्थित बंगले में रहती हैं और इस सरकारी बंगले से पेशेंट भी देखती हैं जबकि वह समय उनका शासकीय अस्पताल में सेवाएं देने का होता है परंतु वहां सेवा न देकर घर से निजी क्लीनिक में मरीज को देखने का कार्य किया जा रहा हैं और महिला मरीजो से मोटी फीस वसूली जाती हैं,कहा जाता है गर्भवती महिला को दिखलाने का चार्ज उक्त महिला चिकित्सक ने 500 रूपए तय कर रखा है और शासकीय सेवा में मात्र वेतन हाथ लगता है इसीलिए गर्भवती महिलाएं और महिला पेशेंट को उनके घर का रास्ता बता दिया जाता है कहा जाता है डॉक्टर नहीं आएंगे आप उनके निवास पर दिखला सकते हैं,हैरत की बात तो यह है सरकार से मोटा वेतन लिया जा रहा है और सेवाएं प्राइवेट दी जा रही,बताया जाता है इन महिला चिकित्सक के पति जिला चिकित्सालय में बड़े पद पर तैनात है शायद इसीलिए उनकी मनमर्जियां जोरों पर हैं जब उनका मन होता है तब वह इस शासकीय सेवा में उपस्थिति रहती हैं वरना घर पर निजी क्लीनिक चलती रहती हैं, इस मामले में नाम न छापने पर एक महिला मरीज ने बताया कि महिला चिकित्सा गर्भवती महिलाओं को महंगी-महंगी दवाएं लिखकर देती हैं जो की उनके बताएं अनुसार मेडिकल स्टोर्स पर ही उपलब्ध होती हैं और मजे की बात तो यह है शुरू से लेकर आखरी तक गर्भवती महिला को परिजन उक्त महिला चिकित्सक को दिखलाते हैं उसके बाद भी आखरी में वह ऑपरेशन की सलाह देती है वह सेवा भी वह जबलपुर के तय सुदा अस्पताल में ही करवाती हैं क्योंकि नॉर्मल डिलीवरी में सिर्फ आशीर्वाद मिलता है और ऑपरेशन में कम से कम चालीस रुपए का खर्च होता है यह सब पेशेंट के हिसाब से तय कर दिया जाता है यहां पर खून की जांच से लेकर दवाइयां तक में कमीशन की ताकत होती है दिनभर पेशंटों से महिला चिकित्सक का आंगन भरा होता है हैरत की बात तो यह है सक्षम अधिकारी भी आते हैं और जिले से बड़े डॉक्टर भी आते हैं उनको यह अलग से भीड़ नजर नहीं आती और ना कभी यह पूछा जाता की प्राइवेट सेवा क्यों दी जा रही है जबकि वह समय उनके शासकीय सेवाओं का होता है इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोटेगांव भी टुकुर-टुकुर बाजू से सब देखते रहते हैं मगर कुछ करने में सक्षम नहीं है जिसके चलते गरीबों को भी इसी चक्की में पिसना पड़ता है जिसमें सक्षम लोग जाते हैं क्योंकि यह उनकी मजबूरी होती है और सरकारी अस्पताल में देखने को कोई तैयार नहीं होता है सब अपने कमरों से ज्यादा सेवाएं देना पसंद करते हैं।



