कटनी में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज का विरोध तेज
ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी शहर में लंबे समय से मेडिकल कॉलेज की मांग उठती रही है। करीब डेढ़ दशक से अलग-अलग मंचों पर आंदोलन, धरना और प्रदर्शन होते रहे। जनता का साफ कहना था कि कटनी को एक सरकारी मेडिकल कॉलेज चाहिए। लेकिन हाल ही में सरकार ने मेडिकल कॉलेज को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में स्वीकृति दी है।
इसके खिलाफ शहर में अब नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर लगातार लोग अपनी राय रख रहे हैं। कोई इसे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला निर्णय बता रहा है, तो कोई कह रहा है कि इससे आम जनता को नुकसान होगा। वहीं कुछ लोग इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कमजोरी और चुप्पी से भी जोड़ रहे हैं।
स्थिति यह है कि छोटी-छोटी बातों पर कटनी में राजनीतिक होर्डिंग्स देखने को मिल जाती हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज को लेकर चुप्पी और श्रेय लेने से परहेज़ साफ दिखाई दे रहा है।
जनता की मांग थी कि कटनी को पूरी तरह से सरकारी मेडिकल कॉलेज मिले, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके। लेकिन पीपीपी मॉडल आने से लोगों में आशंका है कि इलाज महंगा होगा और निजी हाथों में चिकित्सा शिक्षा व सेवाएं सिमट जाएंगी।



