जबलपुर दर्पण

राधे राधे के जय घोष से ऊर्जान्वित होती रही २१२वीं कल्पकथा काव्यसंध्या

जबलपुर दर्पण । प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रेम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी ने बताया कि राधाष्टमी पर्व पर आयोजित कल्पकथा परिवार की २१२वीं काव्यगोष्ठी निरंतर राधे राधे जय घोष से ऊर्जान्वित होती रही।दो चरणों एवं लगभग चार घंटों के भक्तिभाव को समर्पित आयोजन का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे ने संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ किया। जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से जुड़े साहित्य सुधि विद्वान सृजनकारों ने भाग लिया।इटावा उप्र की धरती से जुड़े सैन्य साहित्यकार श्री भगवानदास शर्मा प्रशांत जी की अध्यक्षता एवं प्रयागराज उप्र से जुड़ीं विद्वत सृजनकार डॉ कुमारी शशि जायसवाल जी के मुख्यातिथ्य का कार्यक्रम निरंतर काव्य रचनाओं के साथ – साथ रोचक प्रश्नावली एवं राज राजेश्वरी श्री राधे रानी के पावन प्रसंगों की आनंदमय चर्चा से सुवासित होता रहा।आशुकवि भास्कर सिंह माणिक जी कोंच जालौन उप्र के मंच संचालन में पहली प्रस्तुति कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा जी द्वारा संस्कृत भाषा में किए गए “श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत” स्वरबद्ध पाठ की हुई जिससे वातावरण मानों पूर्ण राधामय हो गया।यहां से कार्यक्रम व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा जिसमें दिल्ली से जुड़ीं साहित्य शोधार्थी आदरणीया प्रीति भारती कवियत्री माधव भट्ट ने काव्य रचना “अपनी किशोरी जी के चरण में दबाऊंगी” सेवा भावना की प्रस्तुति दी।रायगढ़ छत्तीसगढ़ से जुड़े भौतिक विज्ञान के अध्यापक श्री अमित पण्डा जी ने कृष्णप्रिया के चरणों में वंदना करते हुए “राधा तुमको पुकारे घनश्याम जी” सुमधुर काव्य गायन से मन मोह लिया।नाथ नगरी बरेली से जुड़े नवोदित रचनाकार श्री मिलन उपाध्याय जी मिलनसार कवि ने “ठकुरानी की ठुकराई है यहाँ ठकुरानी को राज चले।” रचना सुनाकर सभी को झूमने पर विवश कर दिया।नागपुर महाराष्ट्र से जुड़ीं श्रीमती मेघा अग्रवाल जी ने “राधा जन्म बधाई” गीत के माध्यम से वृषभानु नंदिनी के प्राकट्य पर आनंद मंगल बधाई प्रस्तुत की वहीं उत्तरकाशी उत्तराखण्ड से सम्मिलित हुईं डॉ० श्रीमती अंजू सेमवाल जी ने “सब खुशियां मनाओ आज कि राधा रानी का जन्म हुआ।” गीत के साथ आयोजन को विशिष्टता प्रदान की।इनके अलावा विजय डांगे, प्रमोद पटले, डॉ कुमारी शशि जायसवाल, अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, आत्मप्रकाश कुमार, शोभा प्रसाद, सुमन गर्ग, किरण अग्रवाल, सुजीत कुमार पाण्डेय, भगवान दास शर्मा प्रशांत, भास्कर सिंह माणिक, पवनेश मिश्र, आदि ने भी काव्य पाठ किया।दर्शक दीर्घा से ज्योति राघव सिंह, ज्योति प्यासी, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, बिनोद कुमार पाण्डेय, सुनील कुमार खुराना, आदि ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम का विशेष आकर्षण निवाड़ी मप्र से जुड़े विद्वान साहित्यकार एवं प्राचार्य अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत द्वारा प्रारंभ की गई सदा सुकुमारी राधिका जी के प्राकट्य की चर्चा जिसमें उन्होंने प्रामाणिक तथ्य के साथ बताया कि १० लाख गायों के पालक, वृषभानुपुर बरसाना के राजा, मुखिया वृषभानु जी एवं उनकी धर्मपत्नी मैया कीर्ति को राधा रानी यज्ञ भूमि से प्राप्त हुई। उनके साथ चर्चा में किरण अग्रवाल, सुजीत कुमार पाण्डेय, सुमन गर्ग, ने भी भाग लिया।अध्यक्षीय उद्बोधन में भगवानदास शर्मा प्रशांत ने आयोजन को सनातन संस्कृति की गरिमा के अनुरूप बताते हुए कहा कि “श्री किशोरी जू सरकार सकल ब्रह्माण्ड की दिव्य परा शक्ति हैं। उनकी कृपा से जगत संचालित है।” मुख्य अतिथि डॉ शशि जायसवाल जी ने कार्यक्रम को सफल बताते हुए कहा कि “ऐसे कार्यक्रम सामाजिक सांस्कृतिक चेतना के सूत्रधार होते हैं।”कार्यक्रम के अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिन:” शांति पाठ के साथ आभार प्रकट करते हुए पवनेश मिश्र ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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