सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को बताया ‘निजी’
सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य का विवादित बयान:दो-चार रूपये इधर-उधर कर दिए तो सब मेरे पीछे पड़
दैनिक जबलपुर दर्पण/पाटन। नगर का सांदीपनि शा.उत्कृष्ट.उच्च.माध्य विद्यालय,पाटन एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला एक प्राचार्य के द्वारा सूचना के तहत जानकारी नहीं देने पर प्रथम अपीलीय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रथम अपील के दौरान उस बयान से जुड़ा है जो कैमरे में कैद हो गया,जिसमें प्राचार्य यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मैंने दो-चार रूपये इधर-उधर कर दिए तो सब मेरे पीछे पड़ गए लेकिन सकरा गांव में दस एकड़ में बन रहे सांदीपनि शा.उत्कृष्ट.उच्च.माध्य विद्यालय का निर्माणधीन नया भवन जिसकी लागत 29 करोड़ रूपये बताई जा रही है,विद्यालय कि नई बिल्डिंग में हुए लाखों रूपये का हिसाब कोई नहीं पूछ रहा। इस बयान ने न सिर्फ शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी,बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और पारदर्शिता की भी पोल खोल दी। दरअसल स्कूल के प्राचार्य अनुज सेन के द्वारा लम्बे समय से फर्जी बिलों के जरिये सरकारी धन के दुरुपयोग कि जानकारी मिल रही थी उक्त मामले कि जानकारी सूचना के तहत मांगी गई थी जिसे प्राचार्य अनुज सेन एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी ने धारा 6 (1) (ख) के तहत उक्त जानकारी को विशिष्टीकृत एवं सटीक नहीं होना बता दिया और आगे कहा कि धारा 8 (1) (ख) के तहत चाही गयी सूचना किसी लोक क्रिया कलाप और जनहित से संबंध नहीं रखती है तथा व्यक्ति की एकांतता पर अनावश्यक अतिक्रमण करती है। ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोकहित में न्यायोचित नहीं है। अतः प्राचार्य के तर्कों से सहमत होकर प्रथम अपील ख़ारिज कर दी। वही अपीलार्थी भी इस आदेश से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने भी अगले दिन आयुक्त कार्यालय भोपाल में द्वितीय अपील दाखिल कर दी। दरसल प्राचार्य के बयान से पहले एक और गंभीर पहलू सामने आया जब नगर के एक जागरूक नागरिक ने RTI के माध्यम से स्कूल की आय-व्यय में खर्च हुए सरकारी फंड की जानकारी मांगी। लेकिन विभाग ने जानकारी देने से इनकार कर दिया और इसे “व्यक्तिगत सूचना” बताया और इससे “गोपनीयता का उल्लंघन”होने का बेतुका तर्क दिया। यह जवाब खुद में विवादास्पद है,क्योंकि सार्वजनिक धन से जुड़ी जानकारी को निजी मानना न सिर्फ सूचना के अधिकार की मूल भावना के खिलाफ है,बल्कि इस तर्क से भ्रष्टाचार पर परदा डालने की आशंका और गहरा जाती है।
प्राचार्य के बयान से उठे कई सवाल।
प्राचार्य का कैमरे में हुआ बेतुका बयान प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर खुद सांदीपनि स्कूल का प्रमुख यह स्वीकार कर रहा है कि “दो-चार रूपये इधर-उधर” कर दिए तो सब मेरे पीछे पड़ गए और स्कूल की नई बिल्डिंग में लाखो रूपये का गोल माल हो रहा है लेकिन उस पर कोई सवाल नहीं पूछ रहा है,यह कोई मामूली चूक नहीं,बल्कि एक आपराधिक स्वीकारोक्ति मानी जानी चाहिए। कानून के जानकारों का कहना है कि एक शासकीय अधिकारी द्वारा इस तरह कि बात करना बेहद गंभीर लापरवाही है,और यह लोक सेवक आचरण और नियमों का सीधा उल्लंघन है।
29 करोड़ की बिल्डिंग पर चुप्पी क्यों!
प्राचार्य के बयान में यह भी कहा गया कि स्कूल की नई बिल्डिंग में 29 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन इस पर कोई पूछताछ नहीं कर रहा। यह बयान खुद एक चौंकाने वाली टिप्पणी है,जो कहीं न कहीं स्कूल में बड़े पैमाने पर धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है।
RTI कार्यकर्ताओं और आमजनों की मांग:हो जांच
RTI कार्यकर्ताओं और आमजनों ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि जब एक प्राचार्य खुद स्वीकार करता है कि पैसे ‘इधर-उधर’ हुए हैं,तो यह सामान्य मामला नहीं है। इसकी न्यायिक या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच होनी चाहिए। ज्ञात है कि सांदीपनि स्कूल बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए मॉडल स्कूल के रूप में स्थापित किया गया था,अगर वही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है,तो यह नीति निर्माताओं के लिए भी चिंता का विषय है। वही RTI के अधिकार को कमजोर करना और कैमरे में इस तरह के बयान आना,शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता हैं।

