न्यायालय का कड़ा फैसला,भारतीय सेना के जवान पर जानलेवा हमला करने वाले चार दोषियों को 5 वर्ष का सश्रम कारावास

सतीश चौरसिया उमरियापान जबलपुर दर्पण । कटनी न्यायालय ने एक लंबे समय से चल रहे चर्चित प्रकरण में न्याय का ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए भारतीय सेना के जवान पर जानलेवा हमला करने वाले चार आरोपियों को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है । यह फैसला न केवल न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक सशक्त संदेश है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है ।
मामला वर्ष 2020 का है, जब ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम मुरवारी में एक साधारण से विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था । 11 जून 2020 को ग्राम मुरवारी स्थित खाम्हा तालाब पर मिट्टी खोदने को लेकर कहासुनी हुई । उसी दौरान भारतीय सेना में पदस्थ जवान नवीन पाठक, जो उस समय छुट्टी पर अपने गांव आया हुआ था, पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया । अचानक हुए इस हमले में जवान गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया ।
घटना के बाद घायल जवान नवीन पाठक ने थाना उमरियापान में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें ग्राम के ही कुछ लोगों पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया गया था । पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले की जांच शुरू की और सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 ( हत्या का प्रयास ) एवं 34 ( सामान्य आशय ) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया ।
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद न्यायालय ने 13 अक्टूबर 2025 को इस मामले में अपना फैसला सुनाया । अदालत ने पूर्व जनपद सदस्य दादू उर्फ योगेन्द्र पाठक, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष नूतन पाठक, आरएसएस कार्यकर्ता नितिन पाठक और कौशलेंद्र बर्मन को दोषी ठहराया । अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह हमला जानलेवा था और आरोपियों ने पूर्व नियोजित रूप से सामूहिक रूप से यह अपराध किया था ।
न्यायालय ने चारों दोषियों को पांच वर्ष का सश्रम कारावास और प्रत्येक पर ₹2000 का अर्थदंड लगाया । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड का भुगतान न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा ।
इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष में संतोष का माहौल देखा गया । नवीन पाठक ने कहा कि उन्हें न्याय पर पूरा भरोसा था और आज का फैसला उस विश्वास की जीत है ।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है ।
इस निर्णय से जहां पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, वहीं पूरे क्षेत्र में कानून के प्रति विश्वास और न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और गहरा हुआ है ।



