कोदापार के शिक्षक राकेश धुर्वे अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने

बालाघाट जबलपुर दर्पण । किसी भी शासकीय सेवक के लिए घने जंगलों के बीच दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सेवा करना कठिन एवं मुश्किल काम माना जाता है। लोग ऐसे क्षेत्र में सेवायें देने से कतराते भी है। लेकिन राकेश धुर्वे ऐसे ही कठिन क्षेत्र में पूरी लगन एवं निष्ठा से सेवायें दे रहे हैं और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा एवं मिसाल बन गये है।
बिरसा विकासखंड के अंतर्गत सोनगुड्डा ग्राम पंचायत का एक ग्राम कोदापार है। राकेश धुर्वे इसी कोदापार ग्राम की शासकीय प्राथमिक शाला में प्राथमिक शिक्षक के पद पर पदस्थ है। राकेश धुर्वे विशेष पिछड़़ी जनजाति बैगा से आते हैं और कोदापार गांव भी बैगा जनजाति का ग्राम है। राकेश धुर्वे लांजी तहसील की ग्राम पंचायत देवरबेली के दुर्गम ग्राम संदूका के मूल निवासी है। प्राथमिक शिक्षक के लिए चयन होने पर उनकी पदस्थापना कोदापार की प्राथमिक शाला में की गई थी। राकेश धुर्वे ने 09 दिसंवबर 2010 को कोदापार की शाला में ज्वाईन किया था, तब से लेकर अब तक वे इसी ग्राम में अपनी सेवायें दे रहे हैं। अपनी शाला के बच्चों को वे पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाते हैं और उनका भविष्य संवारने के लिए हर जतन करते हैं।
संदूका जैसे दुर्गम ग्राम का निवासी होने के कारण राकेश धुर्वे को अच्छी तरह से पता था कि घने जंगल के बीच बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कैसे काम किया जा सकता है। कोदापार की शाला में आने के लिए उन्हें संदूका से लगभग 50 किलोमीटर का सफर करना होता था। उनके लिए यह एक कठिन दौर था। उनके मन में भी आता था कि इस स्थान को छोड़कर किसी अच्छे स्थान पर ट्रांसफर करा लें। लेकिन उन्हें लगा कि यह अच्छा निर्णय नहीं होगा। उन्होंने अपनी जाति समाज के बच्चों को शिक्षित बनाने के लिए तय कर लिया कि वे कोदापार में ही रहेंगें और बैगा जनजाति के बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगें। शिक्षक राकेश धुर्वे ने शादी के बाद कोदापार में ही अपना छोटा सा घर बना लिया है। वे अपने बच्चों को भी कोदापार के शासकीय स्कूल में पढ़ाते हैं।
शिक्षक राकेश धुर्वे की बड़ी बेटी शशि धुर्वे ने कोदापार के स्कूल से इस वर्ष पांचवी कक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है और वह 04 किलोमीटर दूर माध्यमिक शाला चारघाट में कक्षा 06 में पढ़ने जाती है। शिक्षक राकेश धुर्वे की छोटी बेटी एवं बेटा भी कोदापार के स्कूल में पढ़ रहे हैं। वर्तमान समय में यह हकीकत है कि अधिकांश शिक्षक अपने बच्चों को प्रायवेट स्कूल में पढ़ाते हैं और बहुत कम शिक्षक ऐसे हैं जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। राकेश धुर्वे ने इस मामले में एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। बच्चों में शिक्षा के प्रति रूचि पैदा करने के लिए वे नये-नये प्रयोग भी करते हैं।
कोदापार की शाला में राकेश धुर्वे के साथ ही लालबर्रा क्षेत्र के ग्राम बांदरी के निवासी घनश्याम शरणागत भी प्राथमिक शिक्षक के पद पर 16 जुलाई 2010 से सेवायें दे रहे हैं। घनश्याम शरणागत कोदापार से लगभग 06 किलोमीटर दूर सोनगुड्डा में शिक्षक सदन में निवास करते हैं। कोदापार की शाला के दोनों शिक्षक बच्चों को पूरी लगन के साथ पढ़ाते हैं। जिसके कारण शाला के बच्चों का स्तर काफी अच्छा है। सोनगुड्डा के शिक्षक सदन में बैगाटोला के शिक्षक आरके मिसारे, पानावाही के शिक्षक पन्नालाल हिरवाने, हुमेश बारेवार, गढ़ीटोला के शिक्षक सुरेन्द्र क्षीरसागर एवं चारघाट के शिक्षक आलोक एड़े भी निवास करते हैं।



