दस दिन भी नहीं टिक सकी गड्डे मरम्मत की ‘औपचारिकता’.. डामरीकरण के बहाने ‘चूना लगा गया ठेकेदार’ !

गाडरवारा जबलपुर दर्पण । सार्वजनिक निर्माण से संबंधित चाहे जो भी कार्य हो, अगर उसमें भ्रष्टाचार ना हो तो यह लगभग नामुमकिन सी बात है।ग्रामीणोंजन और प्रतिनिधियों का कहना है कि विशेषकर सड़क निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर ठेकेदार अपनी जेबें भर लेते है और आम जनता पहले की ही तरह त्रस्त परेशान रहती है।हाली में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड जबलपुर द्वारा स्वदेश समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित हुई स्टेट हाईवे-22 के मुख्य मार्ग पर इन दिनों जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढो की खबर पर अपने ठेकेदार को आदेश कर पिपरिया से करेली तक सड़क पर बने जगह-जगह जानलेवा गड्ढो और सड़क की मरम्मत कार्य चालू करा दिया है। परन्तु सड़क मरम्मत कार्य फिलिंग और जानलेवा गड्ढो की मरम्मत कार्य में औपचारिक देखने को मिल रही है। गाडरवारा से ग्राम पंचायत कौड़ियां के बीच श्मशान घाट के सामने बने जानलेवा गद्दा आए दिन क्षेत्रीय लोगों और बाहरी राहगीरों को मौत का दावत देते नजर आते हैं। वहां ठेकेदार के द्वारा व्यवस्थित कार्य न कर केवल दिखावटी औपचारिकताएं की गई है। जिसका खामियाजा सड़क के जानलेवा गड्ढे महज 10 दिनों में ही उखड़ जाएंगे और इतना ही नहीं कुछ सड़क का हिस्सा और गड्डे तो ठेकेदार के लोगों को दिखाईं ही नहीं दिए जिन्हें आमजन द्वारा मरम्मत के लिए धोड दिया गया। स्टेट हाईवे-22 के मुख्य मार्ग पर हमेशा की तरह लीपापोती का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है।
अब स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार पर घटिया सामग्री से सड़क निर्माण करने और सड़क मरम्मत कार्य फिलिंग और जानलेवा गड्ढो की मरम्मत कार्य में औपचारिक लीपापोती कर ठेकेदार और अधिकारी मिलीभगत कर अपनी जेबें भर कर राज्य सरकार पर चूना लगा रहे हैं। साथ ही सड़क की मरम्मत के नाम पर की जा रही औपचारिकता सड़क निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री का सैंपल लेकर लैब में टेस्ट करवाकर और मरम्मत कार्य का अवलोकन करने से पक्ष जांच की जाए ताकि फर्जी बिल लगाकर गमन ना किया जा सके और सरकार को चुना ना लग सके मांग के साथ ही दोबारा गुणवत्ता पूर्वक सड़क की मरम्मत की मांग की है।



