जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

महाव्रतधारी दादागुरु की पैदल नर्मदा परिक्रमा का द्वितीय चरण 27 नम्बम्बर से ओंकारेश्वर से प्रारम्भ

जबलपुर दर्पण। ज्ञातव्य है कि नर्मदा मिशन के संस्थापक श्री दादागुरु मां नर्मदा सहित सभी जीवनदायिनी नदियों के संरक्षण शुद्धिकरण ,प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन एवं पीड़ित मानवता की सेवा के लिए विगत 15 वर्षों से अनवरत क्रियाशील हैं तथा विगत 3 वर्षों से सदी की सबसे कठिन प्रकृति केंद्रित अखंड निराहार महाव्रत साधना कर रहे हैं जो कि ज्ञान विज्ञान के लिए शोध का विषय बन गयी है।दादागुरु का यह व्रत जो केवल मां नर्मदा जल एवं कभी मात्र वायु पर ही आधारित है जिसका उद्देश्य जन जन तक यह संदेश पहुंचाना है। दादागुरु कहते हैं कि हमें प्रकृति ने दुनिया का सबसे असाधारण अमृत जल के स्वरूप दिया हैं जिसका संरक्षण अति आवश्यक है। यदि प्रकृति केंद्रित जीवन जिया जाए तो प्रकृति से प्राप्त यह असाधारण जल ही आहार स्वरूप हो जाएगा । जिस प्रकार नवजात शिशु 6 माह तक मां के आंचल पर आश्रित रहता है और उसे किसी अन्य आहार की आवश्यकता नहीं होती और वह एकदम हस्ट – पुष्ट रहता है उसी प्रकार श्री दादागुरु मां नर्मदा के आंचल वह अमृतमयी दुग्ध स्वरूप मां नर्मदा जल को ग्रहण करते हैं।मां नर्मदा अक्षया हैं इसलिए यह मां नर्मदा के जल की समर्थता है कि 3 वर्षों से निराहार रहने के बाद भी दादागुरु के रोम का भी क्षय नहीं हो रहा है इसलिए नर्मदाजल कि जीवन शक्ति का प्रत्यक्ष उदाहरण श्री दादागुरु हैं।श्री दादागुरु ने 8 नवंबर 2022 को विश्व की पहली 3200 कि मी की अखंड निराहार मां नर्मदा सेवा परिक्रमा भी ओंकारेश्वर से प्रारंभ की थी जिसका प्रभाव देश के अनेक हिस्सों में देखने को मिला था एवं प्रकृति संरक्षण के विचार को ह्रदय में स्थापित करने दादागुरु लाखों लोगों की प्रेरणा बने भारत देश के साथ ही अन्य देशों में भी परिक्रमा का प्रभाव देखने को मिला। दादागुरु के आह्वान पर भारत सहित अन्य देशों में भी अनुयायी संकल्प के साथ देववृक्षों की स्थापना कर उसे संरक्षित कर रहे हैं।दादागुरु कहते हैं आज के युग में प्रकृति संरक्षण ही सबसे बड़ा धर्म एवं सेवा ही यज्ञ है।
इसी उद्देश्य को धारण कर अखंड निराहार मां नर्मदा सेवा परिक्रमा का दूसरा चरण 27 नवंबर 2023 को प्रातः 9 बजे ओंकारेश्वर गौमुख से मां नर्मदा पूजन एवं आरती के साथ प्रारंभ हो रहा है।

श्री दादागुरु के सानिध्य में नर्मदा मिशन द्वारा रचित विश्व कीर्तिमान –

  • श्री दादागुरु द्वारा प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण सम्वर्धन के लिए किया जा रहा देश दुनिया का सबसे बड़ा अखण्ड निराहार महाव्रत गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
  • विगत वर्ष 8 नबम्बर 2022 से दादागुरु द्वारा की गई विश्व की पहली 3200 किमी की अखंड निराहार मां नर्मदा सेवा पैदल परिक्रमा गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज ।
  • दादागुरु द्वारा निराहार रहकर की गयी 3 बार रक्तदानदान सेवा गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।
  • महाव्रत के 1000 दिन पूर्ण होने पर दादागुरु का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
  • अमरकंटक में वृक्षों एवं पर्वत संरक्षण के लिये समर्थ देव वृक्ष रक्षा संकल्प महोत्सव लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
  • विश्व की सबसे बड़ी जबलपुर की संस्कार कांवड़ यात्रा ( रन फॉर नेचर ) को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
  • संस्कारधानी के कला साधकों ने लगातार 25 घंटे प्रकृति संरक्षण के संगीत के माध्यम से जागरण कर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया।

नर्मदा मिशन आप सभी का आह्वान करता है कि अपने जीवन को सबसे बेहतर बनाने के लिए सत्य को समझे और सत्य के साथ चलें अर्थात दादागुरु के साथ चलें औऱ समर्थ समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता निभाए।

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