उमरियापान पंचायत में अव्यवस्था के आरोप तेज

सतीश चौरसिया उमरियापान जबलपुर दर्पण | कटनी जिले की सबसे बड़ी जनपद पंचायत ग्राम पंचायत उमरियापान इन दिनों गंभीर आरोपों और कुप्रबंधन की चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में है । ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की मूल समस्याएं जस की तस पड़ी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली लोगों में नाराजगी का कारण बनती जा रही है। आरोप हैं कि पंचायत सचिव राजकुमार पटेल न तो नियमित रूप से पंचायत कार्यालय में उपस्थित रहते हैं और न ही गांव की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर ध्यान दे रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि सचिव जब भी कार्यालय आते हैं, तो उनका ध्यान विकास कार्यों की निगरानी से अधिक राशि निकासी पर केंद्रित दिखाई देता है, जिसके कारण वे “पैसा निकालने की मशीन” जैसे उपनाम से चर्चा में रहते हैं। इसी तरह पंचायत के सरपंच अटल ब्यौहार पर भी ग्रामीणों के बीच अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि सचिव और सरपंच की कार्यप्रणाली जनहित के विपरीत है और कई कार्यों में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। हालांकि, दोनों ही जनप्रतिनिधियों की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गांव में गंदगी का अंबार, स्वच्छता योजना कागजों में सीमित
उमरियापान ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था बेहद खराब स्थिति में बताई जा रही है। नालियों की सफाई न होना, कचरा न उठना और गली–मोहल्लों के आसपास बदबू फैलना ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। गांववासियों का कहना है कि ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कई योजनाएं और बजट आते हैं, लेकिन इनका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर महीनों तक लगे रहते हैं, जिन्हें हटाने के लिए न तो कोई सफाई कर्मचारी नियमित आता है और न ही पंचायत स्तर पर कोई विशेष पहल की जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह गंदगी बीमारी का खतरा बढ़ा देती है। कई बार शिकायतें जनपद कार्यालय तक पहुंचाई गईं, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों में दर्ज होकर रह गई। पंचायत में स्वच्छता की स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते अब इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीण स्वयं सफाई के लिए आगे आते हैं, लेकिन यह समाधान नहीं, मजबूरी है।
पूर्व में भी निलंबन की कार्रवाई, विवादों से गहरा नाता
कुछ ग्रामीणों ने दावा किया है कि पंचायत सचिव राजकुमार पटेल के खिलाफ पूर्व में भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। बताया जाता है कि विभिन्न अनियमितताओं और विवादों के कारण उन्हें अतीत में निलंबित भी किया गया था। हालांकि उन मामलों का आधिकारिक रिकॉर्ड जनपद कार्यालय से ही स्पष्ट हो सकता है, लेकिन गांव के लोगों में यह चर्चा आम है कि सचिव की कार्यप्रणाली हमेशा विवादों से घिरी रही है। इसी तरह सरपंच अटल ब्यौहार पर भी ग्रामीणों की ओर से समय-समय पर अनियमित कार्यों के आरोप लगाए जाते रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि पंचायत के निर्णयों में पारदर्शिता नहीं दिखाई देती और कई काम बिना जानकारी के या अधूरे ही दिखाए जाते हैं। बजट की वास्तविक उपयोगिता का पता लगाना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं हो पाता, जिससे शंका और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
बिना काम के राशि निकासी के आरोप, ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी
पंचायत में कई ऐसे कार्यों की चर्चा है जिनकी राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन काम जमीन पर शुरू ही नहीं हुआ। उदाहरण के लिए सड़क निर्माण, सामुदायिक भवन की मरम्मत, नाली निर्माण तथा हैंडपंप सुधार जैसे कार्यों की सूची तो लंबी है, पर गांव में ऐसे कई स्थान हैं जहां काम दिखाई ही नहीं देता। ग्रामीणों का दावा है कि सचिव और सरपंच के बीच तालमेल की कमी तथा वित्तीय पारदर्शिता का अभाव ही इन गड़बड़ियों की जड़ है। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि पंच–सचिव की टीम कई बार ऐसे कार्यों का भुगतान करा लेती है जो या तो हुए ही नहीं होते या अधूरे छोड़ दिए जाते हैं। इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें जनपद स्तर पर की गई हैं, लेकिन अब तक कोई कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
स्थानांतरण की मांग तेज, ग्रामीण बोले ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र से बाहर भेजे जाएं सचिव
गांव के कई जागरूक नागरिकों का कहना है कि पंचायत सचिव राजकुमार पटेल का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है और अब समय आ गया है कि उन्हें ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि उनकी कार्यशैली न केवल गांव के विकास में बाधक है, बल्कि पंचायत की छवि भी खराब हो रही है। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि सचिव का स्थानांतरण नहीं हुआ तो ग्रामीण सामूहिक रूप से जनपद कार्यालय एवं जिला मुख्यालय तक शिकायत लेकर जाएंगे। इसी तरह सरपंच की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि सरपंच और सचिव के बीच बेहतर तालमेल होता, तो पंचायत के विकास कार्यों में तेजी आती। लेकिन वर्तमान स्थिति में दोनों ही जिम्मेदार जनप्रतनिधियों पर संवेदनशीलता का अभाव दिखाई देता है, जिसके कारण गांव का विकास थम गया है।
ग्राम पंचायत के विकास की राह में रुकावट
उमरियापान की स्थिति बताती है कि पंचायत स्तर पर यदि जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक से न करें, तो इसका सीधा असर गांव के विकास पर पड़ता है। सड़कें खराब हैं, सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है, कई सरकारी योजनाएं अधूरी हैं और मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है। दूसरी ओर मौके की अनुपस्थिति और ग्रामीणों की सुनवाई न होना समस्या को और बढ़ाता है। इन परिस्थितियों में ग्रामीणों की यह मांग वाजिब प्रतीत होती है कि जनपद प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष जांच कराए और आवश्यकतानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।


