मौन और एकाग्रता मे अपार शक्ति होती है तथा डर और आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु शिवात्मा त्यागी पी एस भारती

पन्ना जबलपुर दर्पण । प्राकृति परमात्मा ने हम सबको सब तरह से सुसज्जित कर पृथ्वी लोक पर भेजा है श्रेष्ठ कर्म परम उद्देश्य जीवन सार्थक साधना करने के लिए लेकिन हम अपने घर परिवार वातावरण कल्चर परिवेश अनुरूप पारंपरिक तरीके से दिशा तय कर लेते हैं जबकि रिवाज के दलदल में तैरना तो ठीक है लेकिन डूबना आत्म हत्या है क्योंकि अच्छी दिशा से व्यक्ति की दशा बदल जाती है और नजर से नजरिया बदल जाता है और मौन और एकाग्रता मे अपार संभावनाएं शक्ति निहित होती है क्योंकि मौन व्रत उपवास एकाग्रचित से सभी इंद्रिय शिथिल होकरश्रेष्ठ कर्म आत्म संयम संकल्प दृढ़ विश्वास इच्छा शक्ति पर आश्रित हो जाती है और आप सब जानते हैं कि परम पिता परमात्मा ने भी एक मुंह दो कान दो हाथ दो पैर संकेत स्वरूप जन्म से दिया है अर्थात कम बोलो मगर सुनो ज्यादा चलो ज्यादा और ज्यादा से ज्यादा श्रेष्ठ कर्म में हाथो का सदुपयोग करें और प्राकृति परमात्मा को साक्षी मानकर कई बार संकल्पित मौन व्रत उपवास अनुष्ठान पांच माह 65दिवसीय 51दिवसीय 21दिवसीय 11दिवसीय नवरात्रि पर्व नवदिवसीय दोनों पक्ष गुरुवार हमेशा श्रद्धा भाव विश्वास के साथ करते हैं और आज भी साल के 365दिन में 65दिवसीय मौन व्रत उपवास मनोभाव ईमानदारी लगन एकाग्रता दृढ़ विश्वास इच्छा शक्ति के साथ परा वाणी अदृश्य शक्ति साक्षात्कार रसपान करते हैं तो कोई भी कार्य मनोभाव ईमानदारी लगन एकाग्रता से करें सफलता सुनिश्चित है मगर व्यक्ति के जीवन में सबसे ज्यादा खतरनाक शत्रु बाधा स्वय का डर और आलस्य है जो हर किसी के पीछे पड़ व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करता है लेकिन यदि आपको डरना है और आलस्य करना है तो कृपया कुविचार विकार अनीति झूठ चोरी चंडाल जैसे घिनौने कृत्यो से करे क्योंकि जो लोग मनोभाव ईमानदारी लगन एकाग्रता दृढ़ विश्वास इच्छा शक्ति संकल्प से श्रेष्ठ कर्म साधना करते है वे सफल होते और डर और आलस्य को दरकिनार कर देते हैं और आज जिस तपोभूमि में स्थान पर सेवा भाव दे रहे हैं वह एक समय का विरान खंडहर संसाधन विहीन डरावनी जगह थी जहां से लोग बाग आने जानें से कतराते थे जो आज कठिन परिश्रम त्याग समर्पण मनोभाव ईमानदारी लगन एकाग्रता दृढ़ विश्वास इच्छा शक्ति से हरी भरी मनमोहक दृश्य का अनुभूति करा रही है और 2009से मां अन्नपूर्णा माहेश्वरी देवी जी स्थल सिद्ध पुरी में निरन्तर अखण्ड ज्योति जल रही है जहां श्रद्धा मनो भाव विश्वास पवित्र आने पर माता रानी श्रद्धालु भक्क्तो की मनोवंक्षित मनोकामनाएं पूर्ण होती है क्योंकि विपदाएं कब रोक सकी है पथ पर चलने वाले को और बाधाये कब बांध सकी है आगे बढ़ने वाले को न कुछ लेकर आए थे और न कुछ लेकर जाएंगे हाथ पसारे आए थे हाथ पसारे जायेंगे लेकिन श्रेष्ठ कर्म साधना यश कीर्ति शेष बचेगी जो अमर ज्योति स्वरूप जलती रहेगी शेष शुभ जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम राष्ट्र प्रेम धर्म सर्वोपरि त्यागी जी मां अन्नपूर्णा माहेश्वरी देवी जी स्थल सिद्ध पुरी बाईपास मुख्य डाक घर एलआइसी पन्ना गुरुवार मौन व्रत उपवास सूर्यास्त तक जय माता दी आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।



