बालिकाओ ने सौर-ऊर्जा से संचालित फव्वîरा

जबलपुर दर्पण । पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता की एक मिसाल पेश करते हुए, सात वर्षीया आर्या त्रिवेदी एवं उनकी तीन वर्षीया अनुजा आर्वी त्रिवेदी ने अपने बाल प्रयासों से एक अभूतपूर्व पहल की है। इन दोनों बालिकाओं ने महज 500 रुपये की लागत से ‘मातृ कामिनी वाटिका’ में एक सोलर फव्वारा स्थापित किया है, जो बिना किसी विद्युत आपूर्ति के केवल सूर्य की किरणों से संचालित होता है। यह फव्वारा पूर्णतः मिट्टी से निर्मित है, जो अपनी प्राकृतिक छटा बिखेर रहा है।
ग्रीष्म ऋतु के आगमन पर इस फव्वारे का जल प्यासे पंछियों के लिए अमृत का काम करेगा। इस प्रकार दोनों बहनों के बालमन से निकले इस विचार ने मूर्त रूप लिया और उन्होंने अपनी स्वर्गीय दादी ब्रह्मलीन कामिनी त्रिवेदी की स्मृति में स्थापित इस वाटिका में यह अभिनव फव्वारा बनाया। यह पुनीत स्थल उनके पितामह, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ब्रह्मलीन आदर्श मुनि त्रिवेदी की स्मृतियों से भी जुड़ा है। आर्या और आर्वी अधिवक्ता असीम त्रिवेदी एवं शक्ति त्रिवेदी की सुपुत्रियाँ हैं।



