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जूडो से छात्राओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता

जबलपुर दर्पण । जूडो आज के समय में खासतौर पर युवतियों के लिए आत्मरक्षा का एक अत्यंत प्रभावी एवं उपयोगी माध्यम बन चुका है। इसलिए प्रत्येक युवतियों को इसका प्रशिक्षण लेना चाहिए। यह जापान की प्रसिद्ध मार्शल आर्ट है, जिसमें बिना किसी हथियार के स्वयं की सुरक्षा करना सिखाया जाता है। जूडो की विशेषता यह है कि इसमें विरोधी की शक्ति और गति का उपयोग उसी के विरुद्ध किया जाता है, जिससे शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी कठिन परिस्थितियों में अपनी प्रभावी रक्षा कर सकता है। उक्तशय के उदगार जूडो संघ के सचिव व वरिष्ठ कोच आबिद हुसैन खान ने व्यक्त किये, उन्होंने बताया कि जूडो केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर मजबूत, संतुलित एवं फुर्तीला बनता है, वहीं आत्मविश्वास, अनुशासन और धैर्य जैसे गुणों का भी विकास होता है। वर्तमान समय में महिलाओं और बच्चों के लिए जूडो प्रशिक्षण विशेष रूप से लाभदायक सिद्ध हो रहा है, क्योंकि यह उन्हें आत्मनिर्भर एवं साहसी बनाता है। इस अवसर पर महिला जूडो कोच नौशीन अंजुम एवं बुशरा अंजुम ने भी जूडो प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मरक्षा के लिए जूडो प्रशिक्षण आज की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने युवाओं, विशेषकर छात्राओं को नियमित रूप से जूडो प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि जूडो न केवल सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध होता है।

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