जबलपुर दर्पण

मध्यप्रदेश विधानसभा में डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने की विरासत संरक्षण और विकास की सराहना, जबलपुर महोत्सव एवं नामकरण की मांग

जबलपुर दर्पण| मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने मांग संख्या 26, 37 और 51 पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रदेश की सरकार की जमकर सराहना की। अपने संबोधन में डॉ. पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र को चरितार्थ करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को साकार कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र लोधी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना की।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
डॉ. पाण्डेय ने खुशी जताई कि प्रदेश सरकार केवल भौतिक विकास (सड़क, पानी, बिजली) तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
विधायक डॉ. पाण्डेय ने सदन में जबलपुर के विकास से जुड़ी दो प्रमुख मांगें रखीं जिसमें जबलपुर महोत्सव के आयोजन का उन्होंने प्रस्ताव रखा कि हनुमानताल (जहां जैन मंदिर एवं बड़ी खेरमाई स्थित है) पर दो दिवसीय “जबलपुर महोत्सव” का आयोजन किया जाए तथा नगर के नामकरण की उन्होंने मांग की कि जबलपुर का नामकरण ऋषि जबालि की तपोस्थली होने के कारण ‘जबाली ऋषि’ के नाम पर किया जाना चाहिए।

डॉ. पाण्डेय ने मंदिरों में नियुक्त पुजारियों और पंडितों के लिए मानदेय की उचित व्यवस्था किए जाने का भी सुझाव दिया।
इसके साथ ही जानापाव लोक (इंदौर) भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव में जानापाव लोक के निर्माण की परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार को धन्यवाद दिया।
महाकाल लोक, ओरछा लोक, देवी लोक एवं पशुपतिनाथ लोक (मंदसौर) प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ‘लोक’ निर्माण की परिकल्पना की सराहना की।
रानी दुर्गावती स्मारक जबलपुर के लिए डॉ अभिलाष पाण्डेय ने कहा कि रानी दुर्गावती जल प्रबंधन की दृष्टि से एक आदर्श शासिका थीं। प्रधानमंत्री के हाथों जबलपुर संस्कारधानी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला रानी दुर्गावती का भव्य स्मारक, वीरांगना को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह स्मारक राजा शंकरशाह एवं रघुनाथ शाह जैसे बलिदानियों को भी सम्मानित करेगा।

संत रविदास मंदिर (सागर) संत रविदास जी के नाम पर सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे भव्य मंदिर को प्रदेश की समावेशी सोच का प्रतीक बताया।
राम वन गमन पथ एवं कृष्ण पाथेय प्रभु श्रीराम के वन गमन पथ एवं भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्थलों (सांदीपनी आश्रम) के विकास की योजना को ऐतिहासिक बताया।
शहीद स्मारक पंडित चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह, टंट्या भील सहित अमर बलिदानियों की स्मृति में किए जा रहे कार्यों (जैसे अलीराजपुर में आजाद नगर) को युवा पीढ़ी को दिशा देने वाला बताया।

डॉ. पाण्डेय ने अंत में सभापति महोदय को बोलने का अवसर देने के लिए आभार व्यक्त किया तथा ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया।

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