रामायण की समकालीन प्रासंगिकता पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, हिमालय के आध्यात्मिक आयामों पर हुआ मंथन

जबलपुर दर्पण । पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय, जबलपुर एवं नवयुग आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज, जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में अंग्रेज़ी विभाग द्वारा “रामायण के अंतर्विषयी आयाम एवं समकालीन प्रासंगिकता: हिमालय की स्तुतियाँ” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन से हुआ, इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। संगोष्ठी का मंच संचालन डॉ. मीना एडिथ केलर द्वारा किया गया, आयोजक सचिव डॉ. प्रतिभा कुमार ने संगोष्ठी के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला। “हिमालय के स्तोत्र” विषय पर समन्वयक नेहा दवे ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन जुड़ीं डॉ. नीरजा ए. गुप्ता कुलपति गुजरात विश्वविद्यालय ने रामायण की समकालीन उपयोगिता को रेखांकित करते हुए इसे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का मूल आधार बताया।
मुख्य वक्ता डॉ अखिलेश गुमास्ता, प्रख्यात अस्थिरोग विशेषज्ञ, जबलपुर ने रामायण के मूल्य को समकालीन जीवन की चुनौतियों और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य से जोड़ाl
कनाडा (टोरंटो) से जुड़े विशिष्ट अतिथि दीप शुक्ला ने वैश्विक संदर्भ में रामायण की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
विशेष व्याख्यान में प्रो. जटा शंकर तिवारी एवं श्री आशुतोष सिंह ठाकुर निर्देशक यंग थिंकर्स फोरम भोपाल ने रामायण के दार्शनिक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
प्राचार्य एवं अध्यक्ष प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने रामायण में राम के आदर्श चरित्र पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रवीण त्रिपाठी कुलसचिव धर्मशास्त्र लाॅ विश्वविद्यालय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रो.अरुण शुक्ल ने रामायण के साहित्य और समकालीन प्रासंगिकता पर अपनेविचार प्रस्तुत किया।
प्रथम तकनीकी सत्र महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. नीलांजना पाठक ने की। मुख्य वक्ता डॉ. अखिलेश गुमाश्ता ने “रामायण: द हाइम्स ऑफ हिमालय” विषय पर गहन व्याख्यान देते हुए हिमालय के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
प्रथम सत्र में डॉ. स्मिता बेलवंशी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी में तकनीकी सत्र में शोध-पत्र वाचन हुआ, जिसमें विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ. ज्योति जुनगरे, नेहा दवे, डॉ. अर्चना सिंह एवं डॉ. अंशुजा तिवारी ने की। ऑफलाइन सत्र का संचालन डॉ. ममता गुप्ता तथा ऑनलाइन सत्र का संचालन डॉ. संघप्रिया तिवारी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. श्रीनिवास राव , अंशुजा तिवारी एवं डॉ. नरेंद्र शुक्ला की विशेष उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
संगोष्ठी में रामायण के साहित्यिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं सामाजिक आयामों पर गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसमें देश-विदेश के विद्वानों, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।
संगोष्ठी में आनलाइन 160 एवं आफलाइन में 30 शोध-पत्रों का वाचन किया गया।
द्वितीय सत्र में आभार प्रदर्शन डॉ रवीश तमन्ना तज़ीर के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ जागेश्वर प्रजापति, डॉ धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी, डॉ नीलिमा, डॉ सुनीता सिंह का विशेष सहयोग रहा।
संगोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।



