उमरिया दर्पण

पीडब्ल्यूडी की अनदेखी से दल-दल बनी पौड़ी खिरवा सड़क; डेढ़ किलोमीटर का सफर बना जोखिम भरा, बारिश में स्कूल, अस्पताल और मंडी तक पहुंचना हुआ मुश्किल

सतीश चौरसिया उमरियापान । ढीमरखेड़ा विकासखंड अंतर्गत पोड़ी से खिरवा को जोड़ने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाला यह मार्ग वर्षों से मरम्मत और निर्माण की बाट जोह रहा है। बरसात शुरू होते ही सड़क कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग केवल पोड़ी और खिरवा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से छात्र-छात्राएं स्कूल जाते हैं, किसान अपनी उपज मंडी तक पहुंचाते हैं, मजदूर रोज़गार के लिए निकलते हैं और मरीज अस्पताल तक पहुंचते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण सभी को रोज़ाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश में बढ़ी मुश्किलें, हर कदम पर हादसे का खतरा-
लगातार हो रही बारिश से सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढों में पानी और कीचड़ भर गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सड़क का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं पैदल चलने वाले, साइकिल सवार और स्कूली बच्चे भी गिरकर घायल हो रहे हैं। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए इस मार्ग से गुजरना और भी कठिन हो गया है। स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर असर-
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दिनों में बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई बार अभिभावक दुर्घटना की आशंका के चलते बच्चों को स्कूल भेजने से भी परहेज करते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा असर- ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण कई बार एम्बुलेंस गांव तक पहुंचने में असमर्थ रहती है। गंभीर मरीजों और प्रसूता महिलाओं को चारपाई या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार मिलने में कठिनाई होती है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी- ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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