भोपाल दर्पणमध्य प्रदेश

सूचना आयुक्त राहुल सिंह का झटका भ्रष्टाचार में फंसे सचिवों की रोंकी गई वेतन वृद्धियां

पंचायत विभाग की टूटी नींद, जिला सीईओ स्वप्निल वानखेड़े ने एकबार फिर की बड़ी कार्यवाही, जिले के 88 पंचायत सचिवों के छिने वित्तीय प्रभार

भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ चुकी है जिसमें रीवा जिला पंचायत के वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े द्वारा पंचायत सचिवों के विरुद्ध एक बार फिर बड़ी कार्यवाही करते हुए जिले के 8 जनपदों के 88 ग्राम पंचायत सचिवों का वित्तीय अधिकार छीनते हुए उनकी वेतन वृद्धिया रोकने के आदेश दे दिए गए हैं।

सूचना आयोग ने रीवा जिला एवं समस्त जनपद पंचायत सीईओ की लगाई थी क्लास

अभी हाल ही में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा कराधान घोटाले मामले में मध्य प्रदेश की 1148 पंचायतों के 300 करोड़ के 14 में वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट को लेकर के जिले की 75 पंचायतों की करारोपण की पात्रता की जांच एवं कराधान से प्राप्त शासन की राशि के उपयोग पर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के विषय में जानकारी के लिए सूचना का अधिकार लगाया गया था जिस पर जिला पंचायत सीईओ एवं डीम्ड पीआईओ द्वारा संबंधित जनपदों को कई बार पत्र जारी कर जानकारी चाही गई थी लेकिन जानकारी न दिए जाने के कारण सूचना आयोग में धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील एवं धारा 18 की शिकायत के उपरांत व्हाट्सएप वीडियो ऑडियो के माध्यम से प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के ऊपर 25 हज़ार रुपये का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

4 घंटे चली सुनवाई में अधिकारियों के छूटे थे पसीने

मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा दिनांक 13, 17 एवं 19 अगस्त को व्हाट्सएप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई सुनवाई में जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेड़े सहित लगभग एक दर्जन तत्कालीन एवं वर्तमान सीईओ को सुनवाई के दौरान जवाब देना पड़ा था जिसमें इन अधिकारियों के पसीने छूटे थे और हालात यह हुए थे कि प्रत्येक अधिकारी तू तू मैं मैं करते हुए एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए नजर आए थे। इस दौरान आयोग की नाराजगी के बाद जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेड़े पर काफी दबाव बढ़ गया था। जिसके चलते इन कार्यवाहियों को देखा जा रहा है।

कराधान घोटाले में फंसी रीवा जिले की 75 पंचायतों पर अभी भी कार्यवाही बाकी

यद्यपि पिछले कुछ दिनों से जिला पंचायत रीवा सीईओ स्वप्निल वानखेडे द्वारा जिले के दोषी सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायकों के ऊपर कार्यवाहीयों का दौर जारी है और वर्तमान में 88 पंचायतों के सचिवों का वित्तीय प्रभार छीनना एवं वेतन वृद्धि रोकना उसी सिलसिले में देखा जा रहा है। परंतु एक्टिविस्य शिवानन्द द्विवेदी का मानना है कि अभी भी कराधान घोटाले की जद में फंसी हुई जिले की 75 पंचायतों के सरपंच सचिवों और अन्य दोषी अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही का ना होना अधिकारियों की कार्यशैली को प्रश्न के दायरे में खड़ा करता है। जानकारों का मानना है की बहुत ही जल्दी सीईओ जिला पंचायत द्वारा कराधान घोटाले के मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों अधिकारियों एवं सरपंच सचिवों के ऊपर कार्यवाही की जा सकती है।

गंगेव जनपद सीईओ अजीत तिवारी को राजनीति के चलते सरकार ने भेजा बालाघाट

कराधान घोटाले के संदर्भ में गंगेव में पदस्थ रहे लिपिक राजेश सोनी के प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्यवाही करने एवं गंगेव जनपद की घोटाले में फंसी हुई 38 पंचायतों के विरुद्ध करारोपण की पात्रता की जांच करने की मंशा रखने वाले प्रभारी सीईओ अजीत तिवारी को राजनीतिक दबाव एवं रसूखदारों के चलते मऊगंज के सीईओ पद से हटाकर बालाघाट भेज दिया गया है। जिसका आदेश अभी दो-तीन दिन पहले मीडिया में वायरल हुआ। बता दें अभी कुछ दिन पहले ही गंगेव जनपद में देवतालाब के विधायक गिरीश गौतम, मनगवां विधायक पंचूलाल प्रजापति एवं कई मंडलों के भाजपा मंडल अध्यक्ष तथा साथ में सरपंच संघ के पदाधिकारी उपस्थित होकर कराधान घोटाले में फंसे हुए सरपंचों एवं सचिवों पर कार्यवाही ना किए जाने का दबाव बना रहे थे एवं अच्छी खासी भाषणवाजी हुई थी जो सोशल मीडिया से लेकर पेपर पत्रिकाओं में भी वायरल हुई थी। वर्तमान गंगेव प्रभारी सीईओ अजीत तिवारी मऊगंज सीईओ पद से बालाघाट स्थानांतरित करने के पीछे इन्ही राजनीतिक हस्तक्षेप को देखा जा रहा है।

मध्य प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों की पिछले 5 वर्ष के कार्यों का कैग ऑडिट किये जाने की माग – एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी

इस बीच मध्य प्रदेश की 1148 पंचायतों के 300 करोड़ के वर्ष 2017-18 के 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट पर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी का मानना है की पिछले 5 वर्ष में 14वें वित्त आयोग की साढ़े 13 हज़ार करोड़ से अधिक की राशि का जांच होना आवश्यक है। एक्टिविस्ट द्विवेदी ने मांग की है की मध्य प्रदेश की 23 हजार से अधिक पंचायतों की पिछले 5 वर्ष के कार्यों की महालेखा प्रबंधक नई दिल्ली के द्वारा कैग ऑडिट किया जाए जिससे पंचायती कार्यों के नाम पर उपयोग की गई शासकीय राशि के बंदरबांट का सही-सही आकलन किया जा सके। रीवा संभाग एवं विन्ध्य क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पिछले 5 वर्ष में हुए भ्रष्टाचार को देखते हुए यह प्रश्न लाजमी भी हो जाता है क्योंकि यदि देखा जाए तो पूरे मध्यप्रदेश से ही ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की निरंतर शिकायतें आती रही हैं जिस पर शासन प्रशासन द्वारा कोई विशेष कार्यवाही नहीं की गई है इससे साफ जाहिर है की इसमें कहीं ना कहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्यप्रदेश शासन में बैठे उच्चाधिकारियों से लेकर राजनीतिक व्यक्तियों का हाथ है। एक्टिविस्ट ने आगे बताया की मध्य प्रदेश की समस्त 23 हजार से अधिक पंचायतों के कार्यों की कैग ऑडिट की जाए तो सारी सच्चाई स्वयं ही सामने आ जाएगी और इसमें एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा।

सोशल ऑडिट एवं सीए ऑडिट स्वयं ही प्रश्न के दायरे में, इसके साथ सरकार नए विकल्प का करें विचार – एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी

एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा पंचायत विभाग के द्वारा की जाने वाली सोशल ऑडिट और अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा की जाने वाली ऑडिट पहले ही प्रश्न के दायरे में हैं क्योंकि इसमें फर्जीवाड़ा को बढ़ावा दिया जाता है और पंचायतों के कार्यों का सही आकलन ना करते हुए फर्जी जानकारी प्रेषित की जाती है जिसका नतीजा है की पंचायतों के कार्यों का इन एजेंसियों के द्वारा ऑडिटर किए जाने के उपरांत भी निरंतर पंचायती अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार सामने आ रहे हैं। अतः या कि सोशल ऑडिट और सीए ऑडिट की प्रक्रिया में परिवर्तन किया जाए अथवा इसे पूर्णतया बंद करके पंचायतों के कार्यों की ऑडिट महालेखा प्रबंधक कैग नई दिल्ली के द्वारा बनाई गई स्पेशल टीमों के द्वारा किया जाए।

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