ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा लगी दांव पर

गुणा गणित बिठाने में जुटी भाजपा, सरकार पर संकट
सतना। मध्य प्रदेश में एक तरफ कोरोना संक्रमण फैलता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सत्ता के सिंहासन पर बैठी भाजपा सरकार के तारणहारो की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश के 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। खरीद फरोख्त के सुनियोजित सिस्टम के आधार पर भाजपा आलाकमान ने मध्य प्रदेश में सत्ता के सिंहासन को चौथी बार हासिल किया है। महज पंद्रह माह वाली कांग्रेस सरकार को अल्पमत में लाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को सत्ता का सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। भाजपाई मास्टर माइंड गेम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा पूरी तरह से उपचुनाव के दौरान दांव पर लगी हुई है। उपचुनाव को लेकर भाजपाई दिग्गज गुणा गणित बिठाने में लगे हुए हैं। अभी हाल ही में भाजपा सरकार के सामने कराए गए तीन तरह के सर्वे रिपोर्ट आने के बाद सरकार और संगठन हैरान हो गया है। कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के सर्मथक 22 कांग्रेसी विधायकों ने एक साथ इस्तीफा सौंप दिया, यही कमलनाथ सरकार में शामिल थे। तीन तरह से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा ने गहन विचार मंथन शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार को यथावत रखने के लिए उपचुनाव की जीत बहुत जरुरी है, इसलिए अब किसी तरह की खामी भाजपा सरकार और संगठन नहीं रहने देंगे। गोपनीय सर्वे रिपोर्ट सामने आने के उपरांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा हाईकमान भी टेंशन में नजर आने लगे हैं। बागी 22 विधायकों के लिए यह उपचुनाव करो या मरो वाला है। ग्वालियर के ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने प्रभाव का शत प्रतिशत करिश्मा नहीं दिखा पाएंगे, यह बात भी अब स्पष्ट होने लगी है। निस्संदेह यदि 27 विधानसभा सीटों पर भाजपा को उपचुनाव में बड़ी हार मिली और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर संकट खड़ा हुआ तो अपने आप भाजपा आलाकमान ज्योतिरादित्य सिंधिया से किनारा कर लेगा। ऐसे में केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री बनने का सपना भी चकनाचूर हो जाएगा। कुल मिलाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा और राजनैतिक कैरियर उपचुनाव में दांव पर लग गया है।
बिज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा लगी दांव पर
आरोप है कि मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को महज पंद्रह माह में सत्ता का सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर करने वाले 22 बागी विधायकों को भाजपा मैनेजमेंट ने साथ निभाने के एवज में 35-35 करोड़ रुपए का नजराना सौंपा है। यह बात मीडिया के माध्यम से बाहर आते ही पूरे मध्यप्रदेश की जनता दंग रह गयी। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताते हुए जनादेश सौंपा था, उसी जनादेश को ज्योतिरादित्य सिंधिया के चक्कर में 22 बागी विधायकों ने भाजपा के हाथों एक झटके में बेंच दिया। चारों तरफ खरीद फरोख्त का मामला जनचर्चाओ में आ गया। मध्य प्रदेश की जिन 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए जाने हैं वहां पर भाजपा अपने उम्मीदवारों के लिए विधिवत प्रचार प्रसार तक नहीं कर पा रही है। हर विधानसभा सीट पर बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए का नारा बुलंद किया जा रहा है। इन 27 विधानसभा सीटों में सांबेर हाईप्रोफाइल सीट है जहां से भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट को कैंडिडेट बनाया है जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू पर दांव लगाया है। इस सीट में प्रचार प्रसार में कांग्रेस सबसे आगे चल रही है। कमोवेश सभी उपचुनाव वाली विधानसभा सीटों पर भाजपा कैंडिडेट्स के लिए जमीन पर प्रचार प्रसार करने वाले इक्का दुक्का ही नजर आ रहे हैं। 27 विधानसभा सीटों पर कैंडिडेट्स और उनके सर्मथको को आम जनता के विरोध का निरंतर सामना करना पड़ रहा है।
सर्वे सही निकला तो भाजपा सरकार छोड़ेगी सिंहासन
गोपनीय स्तर पर भाजपा ने तीन अलग-अलग तरह से जनता के बीच उपचुनाव को लेकर जो सर्वे कराया था उसकी रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा को दंग कर दिया है। रिपोर्ट आने के बाद भाजपा सरकार और संगठन कैंडिडेट्स की हालत बेहतर करने के लिए विचार मंथन शुरू कर दिया। अब सभी को यह पता हो गया है कि यदि सर्वे रिपोर्ट सही साबित हुई तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सत्ता का सिंहासन छोड़ना पड़ेगा। कुल मिलाकर भाजपा सरकार का भविष्य स्पष्ट तौर पर संकट में नजर आने लगा है।



