मध्य प्रदेशसतना दर्पण

सतना कलेक्टर ने चलाया कार्रवाई का चाबूक

मैहर सीमेंट बेलगाम, चालीस साल तक की अवैध खुदाई

सतना। सीमेंट फैक्ट्री की आड़ में गरीब आदिवासियों की जमीन पर अवैध उत्खनन का डंका पिछले चालीस साल से बजाया जा रहा था। जिस पर अंततः सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया ने एक आदेश जारी करते हुए मां शारदा की धरती पर संचालित मैहर सीमेंट फैक्ट्री सरला नगर को जोरदार झटका दिया है। इस संबंध में बताया गया कि बीस साल की सहमति पर मैहर निवासी एक आदिवासी की जमीन मैहर सीमेंट फैक्ट्री सरला नगर को सौंपा गया था। मैहर सीमेंट फैक्ट्री के प्रबंधन को बीस साल के लिए लीज पर दिया गया। बीस साल के लिए लीज पर आदिवासी की जमीन लेने वाली मैहर सीमेंट फैक्ट्री का प्रबंधन लगातार साठ साल तक अवैध उत्खनन करता रहा। बीस साल की समय सीमा बीत जाने के बाद से लगातार आदिवासी अपनी जमीन पर कब्जा हासिल करने के लिए दर दर भटकने लगा। तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर के दरबार में भटकने के बाद भी आदिवासी को उसकी जमीन नसीब नहीं हुई है। आदिवासी के लिए अपने स्वामित्व की जमीन हासिल करना असंभव सा हो गया था। सतना जिले के तत्कालीन कलेक्टर नरेश पाल ने हालांकि आदिवासी के पक्ष में फैसला तो सुनाया लेकिन मैहर सीमेंट कंपनी की आपत्ति के बाद पुनर्विलोकन में ले लिया। सतना कलेक्टर अजय केसरिया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मैहर सीमेंट यह साबित करने में सफल नहीं रहा कि बीस साल की लीज अनुमति पर साठ साल तक खुदाई की जाए। इसके साथ ही बिना भू स्वामी की सहमति के और बिना सक्षम अनुमति के किया गया खनन अवैध भी घोषित किया जाता है। इसकी जांच कर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश कलेक्टर ने उप संचालक खनिज विभाग को दिए हैं। आदिवासी के हक में इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है।

40 साल किया अवैध खनन, लगेगा करोड़ों रुपए जुर्माना

हमारे देश में सतना जिले को सीमेंट हब के नाम से जाना जाता है। यहां मिलने वाले पत्थरों और चट्टानों से सीमेंट तैयार करने का काम किया जाता है। यही वजह है कि सीमेंट उद्योग की नामी गिरामी कंपनियां सतना जिले में अपना प्लांट जरुर खोलना चाहती हैं। मां शारदेय की पवित्र नगरी मैहर के सरला नगर में संचालित मैहर सीमेंट प्लांट के बेलगाम प्रबंधन ने एक आदिवासी की जमीन पर अवैध उत्खनन करने का कीर्तिमान स्थापित किया है। सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अपने जारी आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा है कि भूस्वामी की सहमति के और बिना सक्षम अनुमति लिए मैहर सीमेंट फैक्ट्री के प्रबंधन ने जो चालीस साल तक आदिवासी की जमीन पर खनन किया है, वह पूरी तरह से अवैध है। इस मामले में कलेक्टर सतना ने उप संचालक खनिज को चालीस साल तक किए गए मैहर सीमेंट फैक्ट्री के अवैध खनन की जांच करते हुए दंडात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। सूत्रों ने बताया कि उप संचालक खनिज मैहर सीमेंट के किए गए अवैध खनन की जांच करने के बाद चालीस साल के हिसाब से करोड़ों रुपए का जुर्माना तय किया जाएगा। सतना कलेक्टर के इस फैसले ने दूसरे सीमेंट प्लांट संस्थानों को चौकन्ना कर दिया है।

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