संपादकीय/लेख/आलेख

हमने उसे लड़ना कहा सिखाया

हमने उसे लड़ना कहां सिखाया,
हमने तो उसे बस सहना सिखाया,
लड़की तो बस अबला होती है,
अबला ही बनकर रह जाती है |

लड़की हो नजर नीची करके चलो,
लड़कों से जरा दूर हटके रहो,
अरे ! इतने छोटे कपड़े,
लड़की हो पूरा बदन ढक कर चलो |

जींस-शर्ट में देखकर लड़के बहक जाते हैं,
जो ना करना हो वो भी कर जाते हैं,
साडी के छः इंच के अंतर पर,
आप सबका ध्यान नहीं गया क्या?

आघात करना उद्देश्य नहीं मेरा,
भारत की महान संस्कृति पर,
परंतु इन राक्षसों का वध करो,
फिर जाना तुम दुर्गा पूजा पर |

बेटियों को बंदिशों में रखना छोड़कर,
बेटों को सम्मान करना सिखा दो,
हम लड़कियां भी तो इंसान हैं ना,
थोडा़ सम्मान हमें भी दिखा दो |

अपनी स्थिति अपनी मनोदशा,
अब मैं किसको बतलाऊं,
द्रौपदी के पास तो कृष्ण थे,
अब मैं कृष्ण कहां से लाऊं |

नहीं मांगती बाबा मैं कुछ तुमसे,
बस अब मेरी जान बचा लो,
लड़की होने को बदकिस्मती ना समझूं,
बस मुझे इतना विश्वास दिला दो ||

  • वांछा शुक्ला

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