विस्थापितों एवं पुस्तैनी निवासियों को शासन दे स्थाई पट्टेः सन्तोष

मैहर। नगर के अनेक सिंधी पंजाबी विस्थापित परिवारों को आजादी के 72 साल बाद भी उनके जमीन, दुकानों व मकानों के पट्टे नहीं मिल सके हैं। कई लंबित प्रकरणों का निराकरण आज तक नहीं हो पाया है। इसी तरह शहर के पुस्तैनी निवासी जो आबदी भूमि नजूल मे निवास एवं व्यापार कर रहे है उन्हे भी शासन स्तर पर स्थाई पट्टे अभी तक नही दिये गये है।
इस संबंध में नपा उपाध्यक्ष श्रीमती संतोष चौरसिया ने मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिखकर अधिकारियों को प्रकरणों के निराकरण, पट्टे प्रदान करने के सख्त निर्देश देने का आग्रह किया है। इस संबंध में श्रीमती संतोष चौरसिया ने बताया कि देश विभाजन के समय हमारे शहर में भी बहुत से सिन्धी पंजाबी परिवार आए विस्थापित परिवारों को आश्रय देने का काम हमारे शहर वासियों ने भी किया बड़ा दिल दिखा कर अपनो के साथ तालमेल बनाकर साथ साथ रहने दिया और आज हमारे विकास यात्रा में इन परिवारों का भी बड़ा सहयोग है नगर पालिका में तत्कालीन अध्यक्ष रहते हुये इन सभी परिवारों को बसावट के माध्यम से निवास करने के लिए स्थान भी शासन की गाइडलाइन अनुसार दिया गया था आज जब इनके पूर्वज दिवंगत होते हैं तो इनके नाम की प्रॉपर्टी पर स्वमेय इनके नाम के स्थाई पट्टे शासन द्वारा इनके वारिसों को दिए जाने चाहिए जो आसानी से नहीं हो पा रहे हैं ।
कन्वेन्स डीड मामलों में अधिक दिक्कत- श्रीमती चौरसिया ने कहा है कि आदेश एफ 6-16/2018/सात/ नजूल 21-3/2008 के अलावा 3 अप्रैल 2018 को राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अरूण पाण्डेय ने राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को निर्देशित किया था कि कतिपय स्थानों पर विस्थापितों को संदर्भित परिपत्रों के अन्तर्गत व्यवस्थापित कर कन्वेंस डीड निष्पादित की गई है, किन्तु इन्हें भू-अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया है। ऐसे भूखण्डों को नजूल भूमि के रूप में अंकित किया गया है, जिस कारण विस्थापितों को कठिनाई हो रही है, उन्हें डीड के अनुसार भूमि स्वामी मान्य किया जाये। श्रीमती संतोष चौरसिया ने कहा है कि जिले में ही कलेक्टर कार्यालय में उक्त आदेशों का पालन निचले स्तर के अधिकारी नहीं कर रहे हैं। अगर अधिकारी ईमानदारी से काम करें, तो सरकार को भी करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो सकता है। जिनके नाम कन्वेंस डीड है, और जिनका स्वर्गवास हो चुका है, उनके वारिसों के नाम नामांतरण करना चाहिए, जो नहीं किया जा रहा है। श्रीमती चौरसिया ने शासन को लिखे पत्र में कहा है कि वैसे तो 1972 से लेकर 2003 तक विस्थापितों के प्रकरणों के निराकरण के एक दर्जन से अधिक आदेश पुर्नवास एवं राजस्व विभाग द्वारा जारी किए गए हैं लेकिन इन पर अमल नहीं हो पाया है।
शासन की घोषणा पर जल्द अमल किया जाए- शासन को स्मरण कराया है कि मैहर सहित प्रदेशभर के खासतौर पर सिंधी पंजाबी विस्थापितों और आबादी भूमि नजूल मे निवास कर रहे व्यपार कर रहे पुस्तैनी निवासीयो के प्रकरणों का निराकरण करते हुये स्थाई पट्टे दिये जाये ।



