मौसा मौसी व परिवार ने उतारा मौत के घाट


रिपोर्टर सुभाष दुबे,कटनी दर्पण। कटनी जिले के विजयराघव गढ़ में 30 वर्षी पुरुष की उसी के मौसा व परिवार के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया जांच के बाद पुलिस ने इस अंधी हत्या का रविवार को खुलासा किया है।जमीनी विवाद और आए दिन झगड़े गाली गलौज से तंग आ कर मौसी ने अपने पति और दो पुत्रों के साथ मिलकर की थी अभिषेक ताम्रकार की हत्या । 15 दिन बाद बीते दिवस महानदी के हिनौता घाट में बोरे में बंद लाश एवं सिर कुछ ही दूरी पर पड़े मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला कायम करते हुए हत्यारे को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। एसडीओपी सुश्री शिखा सोनी ने आज मामले का खुलासा करते हुए बताया कि विजयराघव गढ़ थाने में तीन फरवरी को पुष्पा ताम्रकार पति कैलाश ताम्रकार निवासी वार्ड नंबर छः विजयराघल गढ़ द्वारा पुत्र अभिषेक ताम्रकार उम्र 30 वर्ष के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी । मां पुष्पा द्वारा बताया गया था कि 29 जनवरी को रात्रि में अभिषेक का विवाद पड़ोस के रमेश ताम्रकार एवं उनके परिवार से हुआ था जो रिश्ते में उसके मौसा मौसी हैं । उसी रात से अभिषेक गायब था तथा इन पर अभिषेक के साथ घटना करने का संदेह व्यक्त किया था। पुलिस को 13 फरवरी को सूचना प्राप्त हुई कि थाना विजयराघव गढ क्षेत्र के महानदी पुल के नीचे तरफ हिनौता नदी घाट में एक बोरे में शव बंधा पड़ा है सूचना पर थाना प्रभारी एवं थाना स्टाफ मौके पर पहुंचे जहां पर बोरे में शव बंधा था तथा सिर कुछ दूरी पर पड़ा हुआ था बोरे को खुलवाया गया तो उसमे शव था जिसमें शव की शिनाख्त गुमशुदा अभिषेक ताम्रकार के रूप में हुई थी ।घटना स्थल से ही कुछ अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया गया तत्पश्चात मौके पर एस.पी. मयंक अवस्थी एसडीओपी सुश्री शिखा सोनी द्वारा मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया गया एवं दिशा निर्देश दिए गए पुलिस ने तत्काल हत्या का मुकदमा कायम करते हुए संदेही रमेश ताम्रकार उसकी पत्नी अर्चना ताम्रकार एवं उनके लड़के शिवम,व सत्यम ताम्रकार से पूछताछ की गई जिन्होंने हत्या करना स्वीकार किया। प्रथम दृष्टांत पुलिस ने धारा 302 201 34 भादवी का मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया और बताया कि अभिषेक ताम्रकार अक्सर जमीनी विवाद को लेकर गाली गलौज करता था 29 जनवरी को भी वह रात्रि में गाली गलौज व मारपीट किया। जिस पर रमेश ताम्रकार ने अपने परिवार के साथ मिलकर लोहे की धारदार आरी एवं कुल्हाड़ी से अभिषेक ताम्रकार का गला काट कर हत्या कर दी और सबुत छुपाने के लिए शव को बोरे में भरकर महा नदी में फेंक दिया था। विवेचना में कथनों एवं भौगोलिक साक्ष्य के आधार पर उक्त आरोपियो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।



