दमोह दर्पणमध्य प्रदेश

वाहनों की चपेट में घायल हो रहे मवेसी प्रशासन बेखबर

अस्पताल के सामने तड़फती गाय नहीं खुला अस्पतालग्रामीणो ने छोड़ी आस भूलें पशु चिकित्सालय

मड़ियादो । ग्रामीण क्षेत्र ग्राम पंचायत मड़ियादो क्षेत्र के 40 गांव के बीच एक पशु अस्पताल कस्बे में संचालित पशु अस्पताल अक्सर बंद रहता है। ऐसे में पशुपालकों को बीमार गाय, बैल, भैंस एवं बकरी आदि के इलाज के लिए 20 से 40 किमी दूर हटा ले जाना पड़ रहा है। लिहाजा पशुपालकों को न केवल किराये की मार पड़ रही है बल्कि पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। समस्या को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भी की, बाजवूद इसके कोई सुधार नहीं हो पाया है। पशु अस्पताल नियमित रूप से नहीं खुलने के कारण पशुपालकों की प्राइवेट इलाज में जेब हलकी हो रही है जबकि पशु अस्पताल की दीवार पर अस्पताल के खुलने की समय सारिणी भी अंकित है। सुबह 7 से 11 बजे तक और शाम को 5 से 06 बजे तक खुलने का समय लिखा गया है। इतना ही नहीं रविवार को अवकाश के दिन भी सुबह 08 से 10 बजे तक बीमार पशुओं को देखने के लिए समय लिखा गया है लेकिन यह सब दिखावटी साबित हो रहा है। फील्ड वर्क के नाम पर कर रहे प्राइवेट इलाज कृत्रिम गर्भाधान केंद्र में पदस्थ चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ फील्ड वर्क के नाम पर विभिन्न गांवों के पशुपालकों से पैसा लेकर उनके बीमार पशुओं का इलाज कर रहे हैं, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों का निरीक्षण सालों तक देखने को नहीं मिलता और यदि कोई पहुंच भी जाए तो उसे पशु अस्पताल के स्टाफ द्वारा फील्ड वर्क के नाम पर गुमराह कर दिया जाता है।मड़ियादो से 20 किलोमीटर दूर जाकर मजबूरन लेना पड़ रहा पशुओं का इलाजक्षेत्रीय पशुपालक मुन्ना कचेरा, मस्तराम साहू, सुद्दु सेन, रामकुमार ने बताया कि अस्पताल के चक्कर लगाकर परेशान होने के उपरांत मजबूरन हटा या जिला मुख्यालय जाकर बीमार पशुओं का इलाज लेना पड़ रहा है। ऐसे में किराये की मार तो पड़ ही रही है साथ ही पूरा दिन बर्बाद हो जाता है।गोवंश हो रहे दुर्घटना का शिकारशानिवार को सुबह 11 बजे पशु अस्पताल बेरियर नाका के पास सड़क किनारे खडी गाय को अज्ञात भारी वाहन ने टक्कर मार दी। जिससे गाय गंभीर घायल होकर तड़पती रही। इसी प्रकार पिछले दिनों अर्ध रात्रि में मैन रोड पर बैठी एक गाय को भारी वाहन ने रौंद दिया गाय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। ग्राम में आए दिन सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंश की दुर्घटना में मौत हो रहीं हैं। कई गायें भारी वाहनों की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो रहीं हैं। गोवंश की ऐसी दुर्दशा होने पर भी स्थानीय प्रशासन गोवंश के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा। इससे गोवंश के संरक्षण के लिए बनाई गई योजनाएं कागजों तक सिमट कर रहीं गई हैं। शनिवार की अलसुबह सड़क किनारे खडी गाय को तेज रफ्तार भारी वाहन ने टक्कर मार दी। जिससे गाय गंभीर रूप से घायल होकर तड़पती रही। इस घटना से लोगों में नाराजगी है।गोवंश का संरक्षण हो गाय सड़कों पर मारी-मारी न फिरे इसके भले ही सरकार ने कई योजनाएं संचालित की हो लेकिन उन योजनाओं से गोवंश कतई लाभान्वित नहीं है। ग्राम में सरकारी गोशाला होने के बाबजूद भी गोवंश सड़कों पर घूम रहा है। मुख्य बाजार में सड़कों पर भारी संख्या में खड़े गोवंश आये दिन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। इसी प्रकार पिछले दिनों अर्ध रात्रि में मैन रोड पर बैठी एक गाय को भारी वाहन ने रौंद दिया गाय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना पर पड़ी मृत गाय को देख ऐसा लगा कि कोई भारी वाहन गाय को काफी दूरी तक घसीटते हुए ले गया, गहरी नींद में सोई हुई गाय की दुर्घटना में हुई मौत से लोगों में आक्रोश पैदा हो गया। इस संबंध स्थानीय लोगों काकहना है कि स्थानीय प्रशासन को गोवंश की ओर ध्यान आर्कषित करना चाहिए क्योंकि चौक-चौराहों पर मवेशी बैठे रहते हैं। जिससे वह वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय पशु चिकित्सालय में मवेशियों के उपचार के लिए कोई पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना देने के बाद भी मवेशियों का उपचार नहीं किया जाता है, जिससे कई मवेशियों की मौत जाती है।

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