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करोना महामारी को ना समझो मजाक

वर्तमान समय में करोना अपने दूसरे चरण में जबरदस्त तबाही मचा रहा है। भारत सहित संपूर्ण विश्व में पिछले एक डेढ़ वर्ष से करुणा महामारी ने विकसित से विकसित देश को झकझोर के रख दिया। गरीब देशों की स्थिति तो और भी दयनीय है। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश मैं करोना का इतना भयंकर प्रकोप, इस वर्ष देखा रहा है कि अस्पताल से लेकर श्मशान घाट और कब्रिस्तान तक फुल चल रहे हैं। अस्पतालों, कब्रिस्तान और श्मशान घाटों में लगने वाली लाइन कम ही नहीं हो रही है। इतना भयंकर और भयानक रूप देखकर कुछ लोग करोना और करोना बीमारी से संबंधित चुटकुले, हंसी-मजाक और शेरो-शायरी में लगे हैं। यह समय मजा और मजाक उड़ाने का नहीं है। भारत में करो ना के प्रथम चरण मैं सबसे ज्यादा बुजुर्ग और अधिक उम्र के व्यक्ति प्रभावित हुए। अगर इस वर्ष वाले करोना को दूसरे चरण माना जाए तो इसमें युवा और कम उम्र के साथी प्रभावित हो रहे हैं। वैज्ञानिक, डॉक्टर और जानकार यह बता रहे हैं कि तीसरा चरण भी आ सकता है जोकि छोटे और कम उम्र के बच्चों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय काल में करोना, डॉक्टर, अस्पताल, दवा व्यापारियों, शमशान घाट और कब्रिस्तान से संबंधित हंसी मजाक के चुटकुले शेरो शायरी टिप्पणी एवं व्यंग कर रहे है। हमारी संस्कृति सभ्यता और व्यवहारिकता मैं यह अशोभानीय कृत्य होता है। हमारे ऐसे संस्कार होते है जहां हर वस्तु हर चीज पूजनीय एवं सम्माननीय है। हम नदी, पहाड़, पेड़, पौधे जैसी तक चीजों का वंदन अभिनंदन करते हैं।जिस देश में डॉक्टर को भगवान का अवतार माना गया है वहां पर इस संकट काल में हंसी मजाक चुटकुले शोभा नहीं देता।
करोना जैसी भयंकर महामारी मैं विकसित और धनाढ्य देशों की हालत दयनीय हो चुकी है वहां पर आपने जैसे अधिक आबादी वाले देश में आवश्यक दवाइयां, चिकित्सा और संसाधन जुटाना बहुत ही कठिन कार्य है। सरकार का लॉकडाउन लगाना जरूरत नहीं मजबूरी है। जनसंख्या एवं जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण आवश्यक चिकित्सीय सुविधा को सभी तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसलिए सरकार ने लॉक लगाकर अपने लिए वक्त और लोगों को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। कठिन और प्रतिकूल समय चला जाएगा। वक्त लगेगा सब कुछ ठीक हो जाएगा। हमको करोना महामारी के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरणों में नहीं उलझना चाहिए। हमें खुद को बचाना है और दूसरों को भी। खतरा अभी टला नहीं हमें दूसरों के लिए खतरा नहीं बनना है। और ना दूसरे को अपने लिए खतरा बनने देना है। इस महामारी में सब कुछ इतना जल्दी हो जाता है कि वरिष्ठ डॉक्टर भी को भी कुछ समझने का मौका नहीं मिल पा रहा। मेरा सभी से व्यक्तिगत निवेदन है कि जो लोग इस संकट काल में करोना महामारी डॉक्टर अस्पताल दवा व्यापारी सफाई कर्मचारी पुलिस प्रशासन से संबंधित किसी का भी नकारात्मक चुटकुला मजाक शायरी के माध्यम से जो उपहास उड़ा रहे हैं वह गलत है। उन व्यक्तियों से पूछो जिन्होंने लाखों रुपया खर्च करने के बाद भी अपने सगे संबंधियों को खोया है। एक प्रचलित कहावत है कि “जाके पाँव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई” जिसका अर्थ होता है ‘जिसने स्वयं दु:ख नहीं झेला है, वह दूसरे के दु:ख को नहीं समझ सकता। घर में रहे, सुरक्षित रहें। जय हिंद-जय भारत

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