भीगा गेहूं-साहब मीटिंग में बिजी


जबलपुर दर्पण/पाटन संवाददाता। जनता बेचारी क्या करे सरकार की नींद ही 18 मई 2021 को खुली और आनन फानन मे राजधानी से सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र के द्वारा जानकारी दी गई की 1-2 दिन मे प्रदेश में बारिश होने की संभावना है उन सब निर्देशो की अनदेखी करते हुए खरीदी केंद्रों के द्वारा गेहूँ के भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई जिसके कारण खुले में रखा गेहूं गीला हो गया और सरकार को करोड़ों रुपए की राजस्व की हानि होने से इंकार नही किया जा सकता हैं। जो गेहूँ भीगा है इस मे अधिकारियों की लापरवाही है या सोसाईटी केंद्रो की लापरवाही है या फिर सिस्टम की गलती से हुआ है आखिर इन सब का दोषी कौन है। बारिस के पहले ही खरीदी केंद्रों में रखा गेहूँ सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिये था एवं गेहूँ को आगे सुरक्षित स्थान पर बढ़ा दिया जाना था इस समय सरकार का सारा सिस्टम ही गड़बड़ चल रहा है यह हम नही कह रहे है ये कहना सरकार का ही है इसलिये जो बारिस से गेहूँ भीगा है उसमे सरकार की कोई गलती नही है। सिस्टम की गलती के कारण इस साल फिर से गेहूं भींग गया और तो और फिर से सिस्टम की गलती के कारण अब यही खराब गेहूं बीपीएल वालों को दे दिया जाएगा।चुने हुए जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन अधिकारी एसी चेंबर में बैठकर मीटिंग करने मे व्यस्त थे और इधर बारिश के रूप मे तबाही आ कर हजारो कुंटल गेहूँ जो खरीदी केंद्रो मे बाहर खुले मे रखा था उसे भीगा कर चली गई संवाददाता ने सोचा की इस तबाही के बारे मे कुछ चर्चा चुने हुयें जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारियों से करे शायद कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी, लेकिन साहेब ने मोबाईल रिसीव करना उचित नही समझा आज तक जितनी बैठके हुई उनका परिणाम क्या निकला जबलपुर की जनता यह जानना चाहती है।अब यह सवाल मुख्यमंत्री के सामने भी जरूर आएगा कि आखिर जबलपुर में इस तरह की परिस्थितियां क्यों निर्मित हुई कोरोना के नाम पर जनता को क्यों गुमराह किया जा रहा है। जनता परेशान है आने वाले समय में लोग दाने-दाने को मोहताज होंगे और यहां हमारे साहब मीटिंग कर रहे हैं। इस लाकडाउन में आम जनता की क्या स्थिति है इस वास्तविकता से दूर प्रशासन सिर्फ औपचारिकता में अपना समय गुजार रहा है। रही बात नेताओं की उनके बारे में कुछ ना कहें तो ही अच्छा है। बाकी सरकार का पूरा फोकस आम जनता एवं समाजिक संगठन और व्यापारी भाईयो से करोना आपदा के नाम पर अधिक से अधिक दान करवाने मे है आप दान दीजिये पर कोई सवाल जबाब ना करे जो ये कह रहे है वही सही है आपदा की घडी मे दान देकर पूछिएगा मत कहा कितना खर्च हुआ है। अब बेचारी जनता इनको वोट भी दे और ये वोट के बदले मे जनता पर महगाई के रूप मे चोट भी कर रहे है।



