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नार्को टेररिज्म में फंसता युवा वर्ग

मुकेश कुमार सेन
संचालक 
शांतम प्रज्ञा आश्रम
नशा मुक्ति, मनो आरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
जबलपुर
संयुक्त राष्ट्र समय समय पर विभिन्न देशों में नशे की स्थिति के सम्बन्ध में आंकड़े जारी करता हैं. यूएनओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एशियाई देशों में भारत में हीरोइन तथा अफीम की लत सबसे तेज गति से बढ़ रही हैं.नशे का अवैध व्यापार दुनिया का हथियार और दवाइयों के बाद सबसे बड़ा व्यवसाय बन गया है जिसे नार्को टेररिज्म अर्थात नशा आतंकवाद का नाम दिया गया है जिससे सबसे अधिक युवा वर्ग बुरी तरह फंसता जा रहा है।
संपूर्ण विश्व को नशे के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 26 जून को प्रतिवर्ष अंतराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है “International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking” अर्थात “नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस”
नशीली दवाओं या पदार्थों का सेवन करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ते देख संयुक्त राष्ट्र ने 7 दिसंबर 1987 को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाने की घोषणा की थी. इस दिवस के माध्यम से लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के प्रति जागरुक किया जाता है.
पूरे विश्व में इस दिन विभिन्न समुदायों और संगठन लोगों को नशीली दवाओं के प्रति क्षेत्रीय स्तर लोगों को जागरुक करने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रम चलाते हैं. इस दौरान उन्हें नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान और खतरों के बारे में बताया जाता है.
नशीली दवाओं या पदार्थों का सेवन करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ते देख संयुक्त राष्ट्र ने 7 दिसंबर 1987 को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाने की घोषणा की थी. इस दिवस के माध्यम से लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के प्रति जागरुक किया जाता है.
पूरे विश्व में इस दिन विभिन्न समुदायों और संगठन लोगों को नशीली दवाओं के प्रति क्षेत्रीय स्तर लोगों को जागरुक करने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रम चलाते हैं. इस दौरान उन्हें नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान और खतरों के बारे में बताया जाता है.
युवा वर्ग में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का अहम कारण पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बदलता कल्चर है। आज समाज में भौतिकता हावी होती जा रही है। दूसरा अहम कारण संयुक्त परिवार का टूटना भी है। आज एकल परिवार की वजह से बच्चों को वह प्यार व संस्कार नहीं मिल पाते, जिनकी अपेक्षा होती है। ऐसे में एकाकीपन को दूर करने के लिए बच्चे मोबाइल, इंटरनेट आदि से जुड़ जाते हैं। साथ ही नशे की लत के शिकार भी हो जाते हैं। युवाओं को माता-पिता के प्रेम व नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। साथ ही सरकार को भी मादक पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए, तभी युवा पीढ़ी को बचाया जा सकेगा ।
कोई भी ऐसी वस्तु जिसकी मांग हमारा मस्तिष्क करता है किंतु उससे शरीर का नुकसान हो, नशा कहलाता है। मानसिक स्थिति को उत्तेजित करने वाले रसायन जो नींद, नशे या विभ्रम की हालत में शरीर को ले जाते हैं, वो ड्रग्स या मादक दवाएं कहलाती हैं। नशे को 2 भागों में बांटा जा सकता है –
1. पारंपरिक नशा – इसके अंतर्गत तम्बाकू, अफीम, भुक्की, खैनी, सुल्फा एवं शराब आते हैं या इनसे निर्मित विभिन्न प्रकार के पदार्थ।
2. सिंथेटिक ड्रग्स – इसके अंतर्गत स्मैक, हेरोइन, आइस, कोकीन, क्रेक कोकीन, LSD, मारिजुआना, एक्टेक्सी, सिलोसाइविन मशरूम, फेनसिलेडाईन मोमोटिल, पारवनस्पास, कफ सिरप आदि मादक दवाएं आती हैं।
भारत में नार्को टेररिज्म अर्थात नशे का आतंकवाद प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत और ड्रग कनेक्शन को लेकर पूरे देश में घर घर और चौक चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मीडिया रिपोर्टों में वालीबुड में नशे को लेकर रोजाना हो रहे खुलासे से लोग हतप्रभ है। नारकोटिक्स ब्यूरो बालीवुड में फैले इस काले कारोबार का खुलासा करने में जुटा है। रिपोर्टों के मुताबिक मुंबई में बरबेरी खुश, मेलन बेरी, पीनट बटर, और मड केक,वाई-फाई केक के नाम से नशे का सामान सरेआम बिकता है। बताया जा रहा है मुम्बई में होने वाली पार्टियों में नशे का खुलकर प्रयोग हो रहा है विशेषकर नवोदित कलाकार इसकी चपेट में आ रहे है। यह वह सच है जिसे बॉलीवुड कभी खुलकर कबूल नहीं करता, पर सच से इनकार भी नहीं कर पाता। एक फिल्म अभिनेत्री ने तो यहाँ तक दावा कर दिया की वालीबुड के 90 प्रतिशत लोग प्रतिबंधित नशे का उपयोग करते है।
एक न्यूज चैनल के खुलासे के मुताबिक बॉलीवुड में 70 फीसदी से अधिक कलाकार ड्रग्स का नशा करते हैं। यानी करीब करीब दो तिहाई सितारे और फिल्मी दुनिया की बड़ी बड़ी हस्तियां अधिकतर एमडी ड्रग्स लेती करती हैं, जबकि टेलीवीजन के कलाकारों में गांजे की अधिक डिमांड है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नशे के सौदागार दूसरे देशों से इन ड्रग्स को भारत मंगाता था। ये ड्रग्स कूरियर या इंटरनेशनल पोस्ट के जरिए भारत के बाजार में आते थे। नारकोटिक्स ब्यूरो ने बॉलीवुड में ड्रग का धंधा करने वाले अनेक सौदागरों को गिरफ्तार किया है। नशे की सामग्री कहाँ से आती है और कैसे लोगों के पास पहुँचती है इसके व्यापक अनुसन्धान में सरकारी एजेंसियां जुटी है। हमारे समाज में नशे को सदा बुराइयों का प्रतीक माना और स्वीकार किया गया है। नशा एक एक ऐसी बुराई है, जिससे इंसान का अनमोल जीवन समय से पहले ही अकाल मौत का शिकार हो जाता है। देश में नशे की अधिकांश सामग्री पर रोक है पर ये धड़ल्ले से बाजार में मिल जाती है। शराब के अतिरिक्त गांजा, अफीम और अन्य अनेक प्रकार के नशे अत्यधिक मात्रा में प्रचलित हो रहे हैं। शराब कानूनी रूप से प्रचलित है तो गांजा-अफीम आदि देश में प्रतिबन्धित है ओर इनका क्रय-विक्रय चोरी छिपे होता है। नशे के लिए समाज में शराब, गांजा, भांग, अफीम, जर्दा, गुटखा, तम्बाकू और धूम्रपान (बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चिलम) सहित चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं और पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। नशा एक ऐसी बुराई हैं जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देता हैं। नशे की लत से पीडि़त व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता हैं।
युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीडि़त हैं। ंनशे के रूप में लोग शराब, गाँजा, जर्दा ,ब्राउन.शुगर, कोकीन ,स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं,जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं हैं। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता हैं, और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता जीरो हो जाती हैं ,फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता हैं। शराब और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से पेट और लीवर खराब होते हैं। इससे मुख में छाले पड़ सकते हैं और पेट का कैंसर हो सकता है। पेट की नलियों और रेशों पर इसका असर होता है, यह पेट की अंतडिय़ों को नुकसान पहुंचाती है। इससे अल्सर हो जाता है, जिससे गले और पेट की नली में सूजन आ जाती है और बाद में कैंसर भी हो सकता है । इसी तरह गांजा और भांग जैसे पदार्थ इंसान के दिमाग पर बुरा असर डालते हैं ।
ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीँ कोकीन ,चरस ,अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता हैं। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता हैं। तम्बाकू के सेवन से तपेदिक ,निमोनिया ,साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती हैं। शराब, गांजा और भांग सहित हर प्रकार के मादक द्रव्यों का नशा इंसान को तबाही की ओर ले जाता है। समाज में पनप रहे विभिन्न प्रकार के अपराधों का एक कारण नशा भी है। नशे की प्रवृत्ति में वृध्दि के साथ-साथ अपराधियों की संख्या में भी वृध्दि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शराब को छोडक़र दुनिया में लगभग पांच करोड़ लोग मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े हैं। देश में नशाखोरी में युवावर्ग सर्वाधिक शामिल है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि युवाओं में नशे के बढ़ते चलन के पीछे बदलती जीवन शैली, परिवार का दबाब, परिवार के झगड़े, इन्टरनेट का अत्यधिक उपयोग, एकाकी जीवन, परिवार से दूर रहने, पारिवारिक कलह जैसे अनेक कारण हो सकते हैं ।
संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएन ओडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाधिक भांग का सेवन ईरान 42 प्रतिशत अफ़ग़ानिस्तान 7 प्रतिशत पाकिस्तान 7 प्रतिशत भारत तथा रूस में किया जाता हैं.
युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बेहद तेजी से फ़ैल रही हैं. फैशन के चलते लोग उकसावे में आकर मादक पदार्थों का उपयोग करते है जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता हैं.
स्कूल-कॉलेजों या पास-पड़ोस में गलत दोस्तों की संगति के चलते युवक तेजी से नशे की लत का शिकार हो रहे हैं. अनमोल जीवन को नशे की लत से बर्बाद कर मौत को गले लगाने से बेहतर हैं हम जागरूक बने व लोगों को भी इस बुरी लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करे.
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार को नशे से संबंधित सामानों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाना चाहिए। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया व सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए और युवाओं में जो नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, उसे पूर्णत: खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।

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