ग्राम पंचायत बटौन्धा में सीसी रोडका निर्माण कार्य अधूरा, राशि डकार गए पूरा

जबलपुर दर्पण डिंडोरी। जिले से महज 30 किलोमीटर दूर बसे ग्राम पंचायत बटौन्धा, जो कि डिंडोरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आता है, वहां के स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा बताया गया, कि सरपंच कोदू बाई, सचिव राकेश परस्ते और उपयंत्री इन तीनों ने मिलीभगत करके ग्राम पंचायत बटौन्धा में भ्रष्टाचार का तांडव मचा रखा है ,ग्राम पंचायत में जितने भी सीसी रोड के निर्माण कार्य हुए हैं, वह आज भी अधूरे पड़े हुए हैं, जबकि कागजों में उन सीसी रोडो को पूरा बता कर, पूर्ण मूल्यांकन करके राशि हजम कर ली गई है,ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि सत्र 2019-20 में फोटू के घर से मोहन के घर तक सीसी रोड निर्माण कार्य लगभग ₹400000 की स्वीकृत हुई थी, लेकिन सीसी सड़क अधूरा पड़ा हुआ है, राशि पूरी निकाल ली गई! कमलेश के घर से बैगान टोला तक, लगभग 200 मीटर सीसी रोड निर्माण कार्य की स्वीकृति सत्र2019-20 में हुई थी, जिसका निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा हुआ है, यहां पर भी राशि पूरी निकाल ली गई है! दालचंद के घर से सीताराम के घर तक लगभग 100 मीटर सीसी रोड निर्माण कार्य की स्वीकृति हुई थी, लेकिन आज भी अधूरी पड़ी हुई है, जबकि राशि पूरी निकाली गई ,और भी ना जाने ऐसी कितनी सीसी सड़कों की स्वीकृति कागजों में हुई, लेकिन धरातल में आज तक ना बन पाए, इसी प्रकार से ग्राम लोंदाझिर में शांति धाम का निर्माण कार्य किया गया था, जिसमें कॉलम खड़े हैं, बीम नहीं डाली गई, और सेट लगा दिया गया, शांति धाम तक पहुंचने के लिए जो रोड स्वीकृत हुई थी ,उसकी राशि भी हजम कर ली गई ,लेकिन रोड आज तक नहीं बनी ,पंच परमेश्वर मद से सत्र 2019-20 में लगभग ₹500000 की पुलिया स्वीकृत हुई थी, जिसमें 2 × 3 = 6 सीमेंट की पाइप लगाना था, लेकिन उसमें भी हेराफेरी करते हुए इन पंचायत कर्मियों के द्वारा मात्र 2×2=4 सीमेंट की पाइप को ही लगाया गया, वह भी पंचायत में यहाँ- वहाँ पड़े, टूटे-फूटे पाइपों को लगा दिया गया! और सारी राशि हड़प कर ली गई, इतना ही नहीं इन पंचायत कर्मियों के द्वारा पंचायत राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए मनरेगा योजना के अंतर्गत सुदूर संपर्क रोड हाई स्कूल से शहपुरा मुख्य मार्ग तक की स्वीकृति सत्र 2016-17 में हुई थी,जहां इनके द्वारा पहले से सत्र 2007-08 में स्वीकृत आंतरिक मार्ग के ऊपर ही बना दिया गया, जहां इनके द्वारा बिना कुछ कराए ही फर्जी बिलों के माध्यम से लगभग 1500000 रुपए का बंटाधार कर दिया गया, ग्रामीणों की माने तो हमारे द्वारा जनसुनवाई से लेकर के सांसद, विधायक, मंत्री सभी के पास आवेदन दिए गए, लेकिन आज दिनांक तक ना तो कोई जांच मैं आया, ना ही कोई कार्यवाही हुई, जिससे हम ग्रामीणों का मनोबल टूट गया ,अब तो कहीं शिकायत करने का मन भी नहीं होता ,क्योंकि जब कार्यवाही होती ही नहीं, तो शिकायत करने का क्या मतलब, गौरतलब है कि इतनी शिकायतें होने के बावजूद जनपद व जिले में बैठे शासन के जिम्मेदार नुमाइंदे मौन क्यों साधे हुए हैं! अगर इन शिकायतों की सही जांच हो जाए, तो लाखों रुपए का घोटाला सामने आ सकता है।



