साहित्य दर्पण

अंग दान।

यह एक अन्तर्मन से समर्पण है,
उन्नत दिव्य अर्पण है,
अंग दान एक अतिमहानीय शब्द है,
इस प्रसाद को ग्रहण कर,
सब रह जातें बिल्कुल स्तब्ध हैं।
देने की क्रिया ही सही दान है,
इसमें सदैव सन्निहित रहता ,
खूब इज्ज़त,मान और सम्मान है,
आम इन्सान का यह निजी धर्म है,
खुशियां और सुकून प्राप्त करने का,
सबसे सुंदर व सटीक कर्म है,
अंग दान नया जीवन देने का,
आधुनिक व नवोन्मेष तरीका है,
ज़िन्दगी का यह एक अनोखा व,
सबसे बेहतरीन सलीका है,
हम अपने शरीर से खुशियां पुकारते हैं,
दान का आशीर्वाद प्राप्त कर,
मुस्कान की बरसात करने लग जातें हैं,
अंग दान से यहां ज्योति मिलता है,
खुशियां और सुकून का सही -सही,
इस्तेमाल करने का हर पल हुनर व,
सफलतम प्रयोग करते रहने का,
उत्तम व सही -सही रास्ता खुलता है।
डॉ० अशोक, पटना,बिहार।

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