तेंदूपत्ता पर पड़ी मौसम की मार,कीड़ों के प्रकोप से आदिवासियों की आय का जरिया छीना

जबलपुर दर्पण जबेरा संवाददाता। इस साल तेंदूपत्ता पर मौसम की मार पड़ रही है। आए दिन बादल पानी से पत्ते की आवक कमजोर हुई है वही तेंदूपत्ता को कीड़ो कुतर कर नष्ट कर रहे है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मौसम में पत्तों पर कीटों के प्रकोप की संभावना प्रबल होती है। और पत्ते कमजोर रहते हैं। तेजगढ़ वन परिक्षेत्र टपका कलमाली के जंगलों में लगभग 60 प्रतिशत तेंदूपत्ता नष्ट होने की कगार पर है। दरअसल,आदिवासी सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जो जंगलों से सटे होते हैं। ऐसे में तेंदूपत्ता ही आदिवासियों को सबसे ज्यादा रोजगार और आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है। तेंदूपत्ते से होने वाली आमदनी से अच्छी खासी कमाई होती है. लेकिन इस वार मौसम की मार के कारण तेंदूपत्ता नष्ट होता दिखाई दे रही है। तेंदूपत्ता छित्तरी नामक कीड़ों का रोग लगा होने के कारण तेंदूपत्ता को नष्ट कर रहे है। यही बजह है कि आदिवासियों के रोजगार का जरिया तेंदूपत्ता संग्रह से होने वाली आय का जरिया धीरे धीरे कीड़ों के प्रकोप के चलते तेंदूपत्ता नष्ट होता जा रहा है।


