दमोह दर्पणमध्य प्रदेश

ग्रामीणों को रोजगार देने वन विभाग ने शुरू की दोना पत्तल यूनिट:डीएफओ एमएस उईके ने किया यूनिट का निरीक्षण

प्लास्टिक मुक्त है यह दोना पत्तल

जबलपुर दर्पण जबेरा ब्यूरो। दमोह जिले के सिंग्रामपुर वन परिक्षेत्र के दूरस्थ ऊपरी पहाड़ पर स्थित वन ग्राम कलूमर,जहां पहुंचना ही सबसे कठिन होता है, वहां के लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से वन विभाग रेंजर आश्रय उपाध्याय व वन समिति द्वारा द्वारा दोना पत्तल यूनिट लगाई गई है। प्लास्टिक मुक्त माहुल,पलास के पत्तों से निर्मित यह दोना पत्तल पर्यावरण एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर है। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर एवं जबेरा मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर पहाड़ के ऊपर स्थित वन ग्राम कलूमर में यह यूनिट लगाई गई है जिससे यहां के आदिवासियों एवं ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। ग्राम कलूमर निवासी अर्चना सिंह ने बताया कि पहले हमारे ग्राम में रोजगार नहीं था काम के लिए लोग यहां वहां जाते थे लेकर रेंजर सर की मदद से हमारे ग्राम में दोना पत्तल यूनिट लगाई गई है जिससे हमें रोजगार उपलब्ध हो रहा है वह अच्छे खासे पैसे भी मिल रहे हैं मैं रेंजर आश्रय उपाध्याय को धन्यवाद देना चाहती हूं। कलूमर निवासी दीपू सिंह ने कहा कि हमारे ग्राम में रोजगार नहीं था जिससे हम लोग गुजरात पूर्णा व दूसरे प्रदेशों में काम करने के लिए जाते थे परंतु रेंजर आश्रय उपाध्याय की मदद से गांव में ही दोना पत्तल की मशीन लगाई गई है जिससे हम लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। यूनिट का निरीक्षण करने आज डीएफओ एम एस उईके पहुंचे और उन्होंने दोना पत्तल निर्माण को देखा साथ ही ऐसे निर्माण करने वाले लोगों से चर्चा की। कलूमर व आस पास के इलाके में माहुल,पलास के पेड़ अत्यधिक मात्रा में है और इसके पत्ते स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर माने जाते हैं, इन्हीं पत्तों से दोना एवं पत्तल का निर्माण किया जा रहा है। करीब 5 लाख की लागत से यहां पर मशीन लगाई गई हैं जिनमें अलग-अलग साइज की थाली, कटोरी, प्लेट तैयार की जा रही है। वर्तमान में करीब 10 से 15 लोगों को इस यूनिट में रोजगार मिला है, वहीं करीब 1 सैकड़ा लोगों को भी रोजगार के साधन उपलब्ध हुए है जो यहां पेड़ के पत्ते लेकर पहुंचते हैं। वन विभाग द्वारा बाकायदा सभी का कार्ड बनाया गया है और जितनी तादाद में वह पत्ते लेकर आते हैं उसकी एंट्री उनके कार्ड में की जाती है और इन सभी लोगों को वन विभाग द्वारा भुगतान भी किया जाने लगा है। वन विभाग की यह सराहनीय पहल लोगों के लिए रोजगार लेकर आई है। डीएफओ का कहना है कि अगर निर्मित सामग्री की मांग बढ़ती है तो यूनिट की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है,जिससे और लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

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