साहित्य दर्पण
राखी (अमृत ध्वनि छंद)

मेरा भैया आ रहा , राखी के त्योंहार |
लेता हिलोरे मन है ,उमड़े सारा प्यार ||
उमड़े सारा, भाई प्यारा, कोमल मेरा |
सावन आये, खुशियाँ छाये , जब पग फेरा ||
बन्धन प्यारा, साथ हमारा, होवे तेरा
महके बन्धन,सुखमय जीवन,आशीष मेरा ||
राखी बाँधू प्रेम से, माँगू मैं उपहार |
खुशियों का आधार बन, भैया आना द्वार ||
भैया आना, भाभी लाना, संध्या प्यारी |
मधुरिम मेरी,स्वप्निल तेरी,बहुत दुलारी ||
बन्धन रक्षा, भाव सुरक्षा,स्नेहिल साखी |
पावन वंदन, सावन बन्धन, मेरी राखी ||

कवयित्री
कल्पना भदौरिया”स्वप्निल “
लखनऊ
उत्तरप्रदेश



