डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

फौती नामा,नामांतरण व बटवारा करवाने महीनों से काटना पड़ता है चक्कर

मोटी कमीशन के बाद भी जिम्मेदारों पर काम ना करने के आरोप

डिंडोरी दर्पण ब्यूरो। जिले मैं पटवारियों की मनमानी करने की शिकायतें वैसे तो आए दिन सामने आती ही रहती है,जहां कई क्षेत्रों के पटवारी घरों में बैठकर राजस्व रिकॉर्डओं को दुरुस्त करते हैं, लोगों को फौती नामा,नामांतरण सहित बटवारा करवाने के लिए महीनों से जिम्मेदार अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ रहा है, आरोप है कि मोटी कमीशन लेने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्यों को नहीं निपटाते, जिससे किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ता है। गौरतलब है कि अधिकतर पटवारी घरों में बैठकर अपने कार्यों को निपटाते हैं, मौके में ना जाकर घरों में बैठकर रिकार्डों को दुरुस्त करने से कई गड़बड़ियां निकलकर आए दिन सामने आती रहती है। लोगों की माने तो क्षेत्र के अधिकांश पटवारी बिना मौका स्थल का निरीक्षण किए ही रिकार्डों को दुरुस्त कर देते हैं, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ जाती है। सूत्रों ने बताया कि पटवारी रिकॉर्ड को दुरुस्त करवाने के नाम पर मोटी रकम की वसूली करते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है, लोगों ने जांच कराकर संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की गई है। बताया गया कि जानकारी ना होने के अभाव में आंचलिक किसानों को दलालों के चंगुल में फंसकर जमीन संबंधी कार्यों को निपटाना पड़ता है, जिससे दलाल मनमानी पूर्वक राशि की वसूली भी करते हैं।

  • गांवों में नहीं पहुंचते पटवारी,काटना पड़ता है चक्कर।

बताया गया कि प्रत्येक हल्का के अलग-अलग पटवारी नियुक्त किए गए हैं, बावजूद संबंधित पटवारी गांव में नहीं पहुंच पाते, जिससे कई तरह की मामलों को लेकर स्थानीय किसान पटवारियों से संपर्क नहीं कर पाते, ओर किसानों को पटवारियों के घर,दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जबकि नियमानुसार गांव के पंचायत भवन या अन्य शासकीय भवनों में बैठकर कार्यों को निपटाने के निर्देश हैं ,लेकिन मनमानी पूर्वक पटवारी अपने अपने घर, दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते, बताया गया कि कई किसानों के खेतों को उपजाऊ भूमि ना बताकर पटवारियों द्वारा रिकॉर्ड में पठार भूमि बता दिया गया है, जिससे कई किसानों के धान पंजीयन भी नहीं हो पा रहे हैं। इस तरह की मनमानी आए दिन निकल कर सामने आती ही रहती है, जिससे किसानों को काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने इस ओर शासन प्रशासन से ठोस पहल करवाए जाने की मांग की गई है।

  • सोशल मीडिया से बनाते है दूरी।

ग्रामीणों की माने तो कई ग्राम पंचायत स्तर पर समस्याओं का निराकरण करने व शासकीय योजनाओं का सही जानकारी आदान प्रदान करने के लिए स्थानीय स्तरों पर सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक ग्रुप बनाए जाते हैं, जिसमें संबंधित जिम्मेदार अधिकारी सहित गांव के सरपंच ,सचिव, रोजगार सहायक सहित गिने चुने लोगों को ग्रुप में रखा जाता है, इन्हीं सर्वजनिक ग्रुपों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ,समस्याएं, मांगे आदि ग्रुप में भी भेजी जाती है, लेकिन इन सोशल मीडिया ग्रुपों से स्थानीय स्तर के पटवारी दूरियां बना लेते हैं,संपर्क नंबरों पर भी कई बार फोन लगाने के बाद भी फोन रिसीव नहीं करते, जिससे किसानों को काफी परेशान होना पड़ता है,बावजूद नामांतरण, बिक्री नामा, रजिस्ट्री ,फोती नामा के कार्यों को करवाने में काफी परेशानी होती है,जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

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