नगर के पालन हार,कब होगा सिहोरा नगर की सड़को का उद्धार

इन्जीनियर की मनमानी से आमजन त्रस्त, चहेते ठेकेदारों की मौज
जबलपुर दर्पण नप्र/राजेंद्र सिंह। जिले की सिहोरा तहसील की नगर पालिका परिषद में लगभग 15 वर्षो से भी अधिक समय से अंगद के पैर की तरह जमे अभियंता देवेन्द्र व्यास की ठासक के आगे किसी अधिकारी की नहीं चलती आलम यह है कि वार्ड के निर्माण कार्य इनके बिना संभव नहीं क्योंकि अभियंता अपनी सीट पर मिलते नहीं लेकिन अपने चहेते ठेकेदारो को आसानी से मिल जाते है। क्योंकि निर्माण कार्य के दौरान बिल साहब को ही बनाना है। क्षेत्रीय लोगों को अभियंता के दर्शन भी नसीब नहीं जिसकी वजह से इनके चेंबर की टेबिल कुर्सी धूल खा रही है।
सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों का मिला संरक्षण :- अभियंता का महीन में 4 बार कार्यालय आना और फिर गोल हो जाना यहीं विगत लम्बे समय से चला आ रहा है। आलम यह है कि न तो स्थानीय लोगों के कार्य समय पर हो रहे है न ही नगर पालिका परिषद के कार्य समय पर हो रहे हैं।
15 वर्ष से अधिक का कार्यकाल:- सिहोरा नगर पालिका परिषद में जमे अभियंता को 15 वर्ष से भी अधिक का समय हो गया क्या वजह है जो इतने लम्बे समय से सिहोरा नगर पालिका परिषद में अंगद के पैर की तरह जमे है। निर्माण कार्यों के दौरान अपने चहेते ठेकेदारों के द्वारा दी जा रही मलाई प्रमुख वजह है। शिकायत होने पर भी कार्यवाही नहीं होना रोड़ बनते ही उखड़ने लगती है। नाली निर्माण के दौरान नाली गिरने के कई मामले सामने आए, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता कर अपने चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचा कर खुद भी मालामाल हो गए, नगर पालिका परिषद सिहोरा कार्यालय की सड़क के गढ्ढो की वजह से रोजाना आने जाने वाले लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे है। और अभियंता चैन की नीद सो रहे हैं। तगड़ी सेटिंग की वजह से अभियंता दसको से अंगद के पैर की तरह सिहोरा नगर पालिका परिषद में जमे है।








