उमरिया दर्पणमध्य प्रदेश

रेलवे का रवैया बर्दाश्त के बाहर

उमरिया दर्पण। कांग्रेस ने रेलवे द्वारा जिले मे ट्रेनो का स्टापेज समाप्त करने का कड़ा विरोध करते हुए इसे नागरिकों के सांथ घोर अन्याय बताया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने इस मुद्दे पर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को एक ज्ञापन सौंपा है। जिसमे जिला मुख्यालय मे सभी ट्रेनो का स्टापेज तथा जिले की अन्य स्टेशनो पर कोरोना से पहले रूक रही गाडिय़ों को पूर्ववत करने की मांग की है। इस मौके पर मप्र कांग्रेस कमेटी के महासचिव, पूर्व विधायक श्री अजय सिंह एवं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश शर्मा उपस्थित थे।
आपदा मे अवसर की तलाश
सौंपे गये ज्ञापन मे कहा गया है कि जिले के नागरिक लंबे समय से जिला मुख्यालय मे न रूकने वाली करीब एक दर्जन जोडा ट्रेनो के स्टॉपेज, नागपुर, मुंबई तथा अहमादाबाद आदि शहरों के लिये सीधी सेवा के लिये संघर्षरत हैं। उक्त जायज मांगों को पूरा करने की बजाय रेलवे ने पहले से रूकने वाली गाडियों का स्टॉपेज छीने जाने का क्रम शुरू कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि रेलवे द्वारा आपदा मेे अवसर की नीति के तहत कारोना के कारण रद्द की गई ट्रेनो को स्पेशल बना कर चलाया जा रहा है। इस दौरान सारनाथ, बेतवा एक्सप्रेस के बाद 27 जून से संचालित होने वाली रीवा-बिलासपुर यात्री गाडी का स्टापेज उमरिया तथा जिले की अन्य स्टेशनो से समाप्त कर दिया गया है।
व्यापार और पर्यटन पर पड़ेगा असर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने बताया कि उमरिया के अलावा जिले की चंदिया, नौरोजाबाद और पाली मे भी पूर्व से रूकने वाली कई गाडियों को नहीं रोका जा रहा है।
रेल्वे के इस रवैये के कारण नागरिकों को भारी परेशानी और असुविधा का सामना करना पड रहा है। सांथ ही लोगों मे इसे लेकर भारी असंतोष है। एक ओर जहां सरकार पर्यटन और उद्योगों को बढावा देने की मंशा से यात्री सेवाओं मे विस्तार की बात करती है, तो दूसरी ओर रेलवे द्वारा सुविधाओं मे कटौती की जा रही है। ट्रेने बंद होने का असर यहां के व्यापार और पर्यटन पर पडना तय है। उन्होने कहा कि रेलवे का यह रवैया अब बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा है।
परिस्थिति केे लिये तैयार रहे रेल प्रशासन
कांग्रेस की मांग है कि उमरिया मे सभी गाडियों का स्टापेज सुनिश्चित करने के सांथ ही जिले के अन्य स्टेशनो पर कोरोना से पूर्व रूकने वाली ट्रेनो को तत्काल पूर्ववत किया जाय। ज्ञापन मे साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि मांगे नहीं मानी गई तो इसे लेकर होने वाले उग्र आंदोलन व परिस्थिति के लिये रेल प्रशासन स्वयं उत्तरदायी होगा।

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