पतित पावनी गंगा है श्रीमद्भागवत कथा

जबलपुर दर्पण। समस्त पापों व तापों का नाश कर इस संसार सागर को पार करने के लिए हम पतित पावनी मां गंगा में स्नान करने हेतु हरिद्वार , प्रयाग राज या काशी जाते हैं। परंतु श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसी गंगा है जो आपको भवसागर से मुक्त करने हेतु स्वयं चलकर आपके, गांव,नगर और मोहल्ले में आ जाती हैं।उक्त उद्गार 9 वर्षीय बाल विदुषी व भागवत प्रवक्ता श्रीकृष्ण भाव नंदिनी जी ने सिद्ध श्री दुर्गा मंदिर धनवंतरी नगर में आज श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के प्रथम दिवस व्यक्त किए। कथा के पूर्व कलश यात्रा निकाली गई।जिसमे मुख्य यजमान श्री प्रदीप खरे,श्रीमती रश्मि खरे, धार्मिक विकास समिति के अध्यक्ष के. के.शुक्ला, आचार्य परिषद के प्रांतीय संयोजक डॉ. एच. पी. तिवारी, चंद्रा दीक्षित, शैलेंद्र शर्मा, सुमन शर्मा,गोपाल तिवारी,संतोष श्रीवास्तव प्यासा,रमेश पांडे,कला शर्मा,गोपाल रावत, एच. एस. मालवीय,सीताराम चडार, वर्षा सैनी,मालती पटेल,मंजू राघवन, अंकू पांडे , संतोष द्विवेदी व सास्वत खरे रहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित थे।



