सिहोरा की उपेक्षा बंद करे, शिवराज सरकार

जबलपुर दर्पण सिहोरा ब्यूरो। जिले के सिहोरा और मंदसौर जिले की गरोठ तहसील को 01.10.2003 को मप्र सरकार की कैबिनेट ने जिला बना दिया था और आचार संहिता लग जाने के कारण तत्कालीन सरकार द्वारा गठित राजनैतिक समिति ने एक जनवरी 2004 से दोनों तहसीलों के अस्तित्व में आने और कलेक्टर-एसपी की पदस्थापना करने का निर्णय लिया था। परंतु आज 18 वर्षो के बाद भी मप्र की सरकारों ने कलेक्टर और एसपी की पदस्थापना नही की। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने अपने तीसवें धरने में उक्त बाते उठाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मांग की कि 18 वर्ष पूर्व हुए निर्णय का पालन करते हुए सिहोरा को जिला का दर्जा दिया जाए। कैबिनेट का निर्णय निरस्त नही हुआ धरना स्थल से अपने उदबोधन में समिति के विकास दुबे ने कहा कि सिहोरा और गरोठ को जिला बनाने के लिए मांगे गए दावे आपत्ति के बाद सिहोरा जिला की चतुरसीमा निर्धारण कर मप्र का राजपत्र दिनाँक 11.07.2003 को जारी किया गया था। इस राजपत्र में सम्पूर्ण बहोरीबंद,सम्पूर्ण मझौली और सम्पूर्ण ढीमरखेड़ा को सिहोरा में शामिल किया गया है।इस राजपत्र को आज तक निरस्त नही किया गया है। सिहोरा वास्तव में जिला है और इसमें शेष सभी औपचारिकताएं पूरी कर जिला दर्जा दिया जाना चाहिये। 17 मई को विशाल रैली लक्ष्य जिला आंदोलन समिति ने एक बार पुनः घोषणा की कि आगामी 17 मई को सिहोरा जिला की मांग पर विशाल रैली निकाली जाएगी। इसकी तैयारी के लिए समिति ने सम्पूर्ण सिहोरा को बैनर पोस्टर से पाट दिया है। भारतीय किसान संघ ने सिहोरा जिला का किया समर्थन। सिहोरा जिले के धरने में भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रान्त के सिहोरा तहसील अध्यक्ष सुरेश पटेल ने धरना स्थल पर पहुँच सिहोरा जिला की मांग का समर्थन किया और वचन दिया कि आगामी 17 मई की रैली में उनका संघ पूरी संख्या बल के साथ शामिल होगा। तीसवें धरने में नंदकुमार परौहा,रमेश बर्मन,रामजी शुक्ला,अनिल जैन,नेतराम दाहिया,अमित बक्शी,आशीष पटेल,नत्थू पटेल,नागेंद्र कुररिया,रामलाल साहू,संतोष श्रीवास,पेचू विश्वकर्मा,ए के शाही,राजेश गर्ग,अनिल कुररिया,अजय कुमार,गुड्डू कटेहा,सेंकी जैन सहित अनेक सिहोरावासी मौजूद रहे।



