विजय सूर्यवंशी पर अतिक्रमण के आरोप, वार्ड क्रमांक 2 की भूमि पर बिना रजिस्ट्री के निर्माण कार्य शुरूः प्रशासन मौन

सिवनी जबलपुर दर्पण । नगर परिषद बरघाट के पूर्व अध्यक्ष विजय सूर्यवंशी एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। वार्ड क्रमांक 2 में प्रदीप बरमैया, दिलीप बरमैया और दिनेश बरमैया की पैतृक भूमि पर बिना वैध दस्तावेजों के कथित रूप से निर्माण कार्य प्रारंभ करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों ने विजय सूर्यवंशी पर दबंगई और प्रशासनिक संरक्षण का आरोप लगाया है।
रजिस्ट्री नहीं, फिर भी जारी है निर्माण – प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर निर्माण हो रहा है उसकी रजिस्ट्री विजय सूर्यवंशी के नाम नहीं है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है, और आश्चर्यजनक रूप से पुलिस व नगर परिषद की टीम भी सहयोग करते नजर आ रही है। आरोप यह भी है कि नगर परिषद द्वारा निर्माण स्थल पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का संदेह गहराता है।
प्रशासनिक मशीनरी पर पक्षपात के आरोप – स्थानीय लोगों का कहना है कि आम नागरिक यदि निजी निर्माण करना चाहे तो उसे संबंधित विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है, नक्शा पास करवाना होता है, किंतु यहां बिना दस्तावेज, बिना वैध प्रक्रिया के निर्माण कार्य पुलिस और नगर परिषद की मौजूदगी में कराया जा रहा है। पुलिस की मौजूदगी को तहसीलदार का निर्देश बताया जा रहा है, जबकि भूमि विवादों में पुलिस की सीधी भूमिका नहीं होनी चाहिए।
नगर अध्यक्ष इमरता साहू पर मिलीभगत का संदेह -विजय सूर्यवंशी के इस निर्माण कार्य में नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती इमरता साहू की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नगर अध्यक्ष की आंतरिक सहमति और राजनीतिक दबाव के चलते पूरा प्रशासनिक तंत्र मौन बना हुआ है।
नगर परिषद की ओर से पानी टैंकर भेजना भी इसी समर्थन का प्रतीक माना जा रहा है।
पूर्व विवादों की छाया में फिर उभरे सवाल – पूर्व में भी विजय सूर्यवंशी और उनके कथित सहयोगियों पर आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप लग चुके हैं। उन मामलों में जेल और जमानत जैसी कार्रवाई हो चुकी है।
अब फिर से भूमि विवाद में सक्रियता ने जनभावनाओं को आहत किया है। बुद्धा गार्डन मार्ग को अवरुद्ध करने और शासकीय तालाब की भूमि पर स्वामित्व जताने जैसे कृत्यों से उनके खिलाफ आक्रोश और गहरा गया है।



