संजय टाइगर रिजर्व में फिर हुई बाघ की मौत

सीधी जबलपुर दर्पण । संजय टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि 18 अगस्त की रात दुबरी परिक्षेत्र अंतर्गत खरबर बीट में नर बाघ टी-43 मृत पाया गया। शव मिलने की जानकारी मिलते ही विभागीय अमले में हड़कंप मच गया।
प्राथमिक जांच में करंट से मौत की आशंका
संजय टाइगर रिजर्व के एसडीओ सुधीर मिश्रा ने बताया कि 19 अगस्त 2025 की रात करीब 12:05 बजे खरबर बीट के कक्ष क्रमांक 509 में बाघ का शव देखा गया। प्रारंभिक जांच में संभावना जताई गई है कि बाघ की मौत ग्रामीणों द्वारा फसल बचाने के लिए बिछाए गए करंट प्रवाहित तार में फंसने से हुई है।
मृत बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए। पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों की टीम ने किया और फॉरेंसिक जांच के लिए विसरा सुरक्षित किया गया है।
प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम संस्कार
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, क्षेत्र संचालक अमित कुमार दुबे, NTCA प्रतिनिधि कैलाश तिवारी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ के शव को जला कर नष्ट किया गया। इस मामले में वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
लगातार मौतें और विभाग की लापरवाही पर सवाल
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी रिजर्व क्षेत्र में कई बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मारे जा चुके हैं। कभी मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया जाता है तो कभी बीमारी का हवाला दिया जाता है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि बाघों की 80% मौतें शिकारियों की करतूत का नतीजा होती हैं।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये का बजट बाघ संरक्षण और निगरानी पर खर्च करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आते हैं। मृत बाघों का गुपचुप तरीके से पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार करना विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।



