पी.एम. श्री योजना के मद में गड़बड़ी, बच्चों का भविष्य अधर में

सिवनी जबलपुर दर्पण । प्रधानमंत्री स्कूल (पी.एम. श्री) योजना के तहत जिले के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी किया गया था। योजना का उद्देश्य बच्चों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल लैब, फर्नीचर और खेलकूद की सुविधाएं देना था। लेकिन हकीकत में यह राशि सही उपयोग के बजाय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
लाखों रुपये आए, फिर भी अधूरे काम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भोमा सहित जिले के कई पी.एम. श्री विद्यालयों में लाखों रुपये आए हैं। यह राशि अधोसंरचना निर्माण, लैब और फर्नीचर के लिए थी, मगर अधिकांश कार्य अधूरे हैं। बच्चों को वादा किए गए संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।
कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
इस योजना की मॉनिटरिंग कर रहे जिम्मेदार अधिकारी खुद इस मद में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। आरोप है कि जिले के समस्त पी.एम. श्री कार्यों की निगरानी कर रहे जिला परियोजना समन्वयक (अतिरिक्त प्रभार) श्री संजीव राय ठेके और भुगतान प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे मामले में भारी कमीशनखोरी चल रही है।
प्राचार्य पर भी सवाल
भोमा के पी.एम. श्री विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य श्रीमती रासमणी मर्सकोले को अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि विद्यालय में कितनी राशि आई और किन कार्यों में इसका उपयोग हुआ। पत्राचार में देरी और पारदर्शिता न होने से संदेह गहरा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या प्राचार्य भी इस पूरे प्रकरण में दबाव में हैं?
बच्चों पर दबाव, शिकायत पर कार्रवाई की धमकी
चौंकाने वाली बात यह है कि विद्यालय में छात्रों को 181 हेल्पलाइन पर शिकायत न करने का दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि शिकायत करने पर बच्चों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) जारी कर विद्यालय से निकालने की धमकी दी जा रही है। यह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
पढ़ाई ठप, कक्षाएं कम
विद्यालयों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। नियमित पीरियड नहीं हो रहे, शिक्षक अतिरिक्त प्रभार के कारण पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे। ऐसे में छात्रों का भविष्य अधर में है।
अभिभावकों की नाराजगी, जांच की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।



