स्यावनी में अधूरा पड़ा कचरा घर, फिर भी भुगतान पूरा

टीकमगढ़ जबलपुर दर्पण । नजदीकी ग्राम पंचायत स्यावनी में स्वच्छता अभियान के तहत बनाया जा रहा कचरा घर आज तक अधूरा है। खास बात ये कि निर्माण कार्य लागत दो लाख तीस हजार रुपए का पूरा भुगतान पहले ही कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सालों पहले शुरू हुआ था निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक, कचरा घर का निर्माण करीब चार-पांच साल पहले शुरू किया गया था। शुरुआत में कुछ दीवारें खड़ी की गईं, लेकिन इसके बाद काम बंद हो गया। न छत डाली गई और न ही शेड लगाया गया। अब ढांचा अधूरा खड़ा है और वहां कचरे की जगह झाड़ियां उग आई हैं।
सरपंच को जारी हुआ था भुगतान
जानकारी के अनुसार इस निर्माण के लिए पूरी राशि पंचायत को मिली थी,जिसे तत्कालीन सचिव देशराज विश्वकर्मा व सरपंच को जारी कर दिया गया। लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह काम सिर्फ कागजों पर पूरा हुआ है।
ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत से नहीं मिला जवाब
जब दैनिक भास्कर ने इस मामले में ग्राम पंचायत स्यावनी और जनपद पंचायत पलेरा के जिम्मेदारों से बात करनी चाही, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल दी।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि पैसे खर्च हो गए, लेकिन कचरा घर आज तक तैयार नहीं हुआ। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही के अभाव को उजागर करता है। यदि इस तरह योजनाएं अधूरी छोड़ दी जाएं और भुगतान कर दिए जाएं, तो गांवों की तस्वीर कैसे बदलेगी?
इनका कहना है-
लाॅकडाउन के समय में यह कचरा घर स्वीकृत हुआ था। मैं आठ माह पूर्व पदस्थ हुआ हूं। यदि कार्य अधूरा पड़ा है और कागजों में पूर्ण दिखाई दे रहा है तो इसमें सचिव और सरपंच द्वारा गलतियां की गई होगी।जिसकी जांच करवाकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रमाशंकर गुप्ता उपयंत्री ज.पं.पलेरा।



