कटनी दर्पण

संसारपुर कांड: दो दिन बाद भी आज़ाद घूम रहे शराब ठेकेदार और गुर्गे

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम संसारपुर में शराब ठेकेदार मंचू असाटी और उसके गुर्गे पिंटू कुशवाहा और नीलेश जैसावाल ने दो दिन पहले जो तांडव मचाया था, उसकी दहशत आज भी गांव में कायम है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

अवैध पैकारी से शुरू हुआ विवाद, गाड़ी चढ़ाकर ग्रामीणों को कुचला
ग्राम संसारपुर में लंबे समय से चल रही अवैध पैकारी को लेकर ग्रामीणों का विरोध बढ़ रहा था। बताया जाता है कि जब ठेकेदार मंचू असाटी अपने गुर्गों नीलेश जैसवाल और पिंटू कुशवाहा के साथ गांव पहुंचा तो ग्रामीणों से उसका विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने ग्रामीणों को सबक सिखाने के लिए अपनी कार चढ़ा दी।
इस घटना में कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए और गांव में चीख-पुकार मच गई।

खबर से हरकत में आई पुलिस
वारदात के बाद शुरू में पुलिस पर आरोप लगा कि उसने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। शुरू में किसी तरह की कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों में गुस्सा भड़क उठा।
आखिरकार भारत दिनभर ने जब इस खबर को जोरदार तरीके से प्रकाशित किया, तभी पुलिस हरकत में आई और ठेकेदार मंचू असाटी सहित उसके दोनों गुर्गों पर हत्या के प्रयास (307 आईपीसी) और आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं
मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। थाना पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ठेकेदार से मिलीभगत कर रही है, तभी अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई।

सवालों के घेरे में पुलिस
दरअसल, कटनी में आज माइनिंग कॉनक्लेव 2.0 आयोजित हो रहा है। इस बड़े आयोजन की तैयारियों में एसपी अभिनय विश्वकर्मा और अन्य आला अधिकारी व्यस्त हैं। इसी व्यस्तता का फायदा उठाकर स्थानीय पुलिस ढीली पड़ गई है।
पुलिस पर पहले से ही आरोप लगते रहे हैं कि वह शराब ठेकेदारों और पैकारी माफियाओं के प्रति नर्म रुख अपनाती है।

ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश
गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। घटना के बाद घायल हुए कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

👉 अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस शराब माफियाओं पर शिकंजा कसने का साहस जुटा पाएगी या फिर ठेकेदार मंचू असाटी और उसके गुर्गे यूं ही कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे?

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