ढीमरखेड़ा में सूचना का अधिकार बना भ्रष्टाचार का आईना

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी जिला की ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत हरदी देवरी में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनपद सदस्य नारायण कोल ने ग्राम पंचायत हरदी के सचिव गोपाल सिंह और सरपंच जयकरण कोल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 16 जून 2025 को उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत ग्राम पंचायत के 2022 से 21 अप्रैल 2025 तक के निर्माण कार्यों की प्रमाणित जानकारी मांगी थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई है।
सूचना का अधिकार की जगह रिश्वत की पेशकश
जनपद सदस्य नारायण कोल (वार्ड नंबर 08) ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने बार-बार जानकारी मांगी, तो सचिव और सरपंच ने उन्हें चौंकाने वाली पेशकश की। जानकारी देने के बजाय, उन्होंने कोल को गिट्टी, रेत और नकद पैसे लेने का प्रस्ताव दिया, ताकि वह RTI आवेदन वापस ले लें। कोल ने इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया और कहा कि यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का मामला है।
किन-किन फंड्स का मांगा गया था ब्यौरा?
नारायण कोल ने अपनी RTI अर्जी में विधायक निधि, विधायक विकास निधि, सांसद निधि, 14वें वित्त, 15वें वित्त और 5वें वित्त आयोग से हुए सभी निर्माण कार्यों के बिल और वाउचर सहित पूरा ब्यौरा मांगा था। इस तरह की विस्तृत जानकारी न देना और उसके बदले में रिश्वत की पेशकश करना इस बात की ओर इशारा करता है कि पंचायत में वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर हो रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जनपद सदस्य ने इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से शिकायत करने की बात कही है। यह मामला न सिर्फ पंचायत स्तर पर पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून को कमजोर करने की कोशिश भी है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर आरोप के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या दोषी सरपंच और सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है।
यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। वे चाहते हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और जनता के पैसों का हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए।



