विश्व हिंदी दिवस कागरिमामय आयोजन

जबलपुर दर्पण। हिंदी ही वह भाषा है, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक, असम से गुजरात तक भारत को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास किया है। यह केवल भाषा नहीं अपितु हमारी अस्मिता का प्रतीक है।” उपर्युक्त उद्गार कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. स्मृति शुक्ल (वरिष्ठ प्राध्यापिका, शास. मानकुंवरबाई महिला महाविद्यालय द्वारा व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में महाविद्यालय की उप प्राचार्य
डॉ. अंजली डिसूजा की उपस्थिति रही।संत अलॉयसियस स्वशासी महाविद्यालय, जबलपुर के हिंदी विभाग द्वारा ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फा. वलन अरासु के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री गंगा एवं समूह द्वारा हिंदी गीत गायन से किया गया। तत्पश्चात बी. ए. तृतीय वर्ष के छात्र निखिल शर्मा द्वारा हिंदी की वर्तमान स्थिति पर आधारित कविता पाठ किया गया। बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र मयंक प्रकाश द्विवेदी ने छात्र प्रतिनिधि के रूप मेंभाषण प्रस्तुत किया। बी.ए. तृतीय वर्ष के छात्र सचिन करसा के द्वारा हिंदी से जुड़े रोचक तथ्य प्रस्तुत किए गए।कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष हिंदी डॉ. रामेन्द्र प्रसाद ओझा का उद्बोधन इस प्रकार था कि “बिना निज भाषा के किसी समाज या राष्ट्र का अस्तित्व नहीं हो सकता है। हिंदी भाषा को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए सबसे पहले हम सभी को उसे पूर्णतः स्वीकार करनाहोगा।”कार्यक्रम को सफल बनाने में उपप्राचार्य डॉ. कल्लोल दास, डॉ. कैरोलिन सैनी, डॉ, विश्वास पटेल, डॉ. तुहिना जौहरी, डॉ. रीना थॉमस, डॉ. अभिलाषा शुक्ला, डॉ फा. प्रदीप रॉडरिक्स एवं सुश्री अनुष्का मिश्रा का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन सुश्री मानशी राय एवं सुश्री कौतुकी उपाध्याय तथा धन्यवाद ज्ञापन सुश्री अंजली रघुवंशी द्वारा किया गया।



