बालाघाट दर्पण

नेपाल के बेकाबू हालात में फंसे पशुपतिनाथ गये बालाघाट के यात्रियों की सांसद भारती पारधी ने की मदद

बालाघाट जबलपुर दर्पण । नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद युवाओं में बढे आक्रोश उग्र हिंसक प्रदर्शन से नेपाल के हालात बेकाबू हैं, उग्र प्रदर्शन और हिंसा की घटना इतनी बयावह है कि युवा प्रदर्शनकारियों ने संसद तथा प्रधानमंत्री एवं राष्ट्र्पति के निजी आवास तक को आग के हवाले कर दिया वहीं मंत्रियों को तक पीटा जा रहा है ऐसे बेकाबू हालात और हिंसक प्रदर्शन के बीच वह श्रद्धालु यात्री भी फंस गये जो अटूट आस्था के केंद्र भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने नेपाल की राजधानी काठमांडू गये थे और इस सैकडों दर्शनार्थियों में बालाघाट जिले की वारासिवनी तहसील के 13 लोग भी शामिल थे जो नेपाल की यात्रा में गये थे और भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन कर अपने चैपहिया वाहन से भारत लौट रहे थे जिन्हें नेपाली सेना ने रक्‍सौल बार्डर पर रोक कर आगे जाने से मना कर दिया।

नेपाल की राजधानी के हिंसक हालात से भयभीत इन श्रद्धालुओं ने क्षेत्र के एक भाजपा कार्यकर्ता के माध्यम से बालाघाट-सिवनी सांसद भारती पारधी से सम्पर्क कर घटना की सारी जानकारी दी और सांसद श्रीमती भारती पारधी ने अचानक उत्पन्न हुए हालातों की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय से सम्पर्क कर नेपाल में भारतीय दूतावास से सम्पर्क साधा और नेपाल बॉर्डर पर फंसे वारासिवनी तहसील के दर्शनार्थियों को नेपाल के रक्‍सौल बॉर्डर से सुनौली बॉर्डर पर पहुंचाया जहां से वे सकुशल भारत की सीमा के भीतर पहुंचे।

नेपाल के हिंसक कर्फ्यूग्रस्त माहौल में फंसे रहे नागरिक– देखा जाए तो नेपाल में हालात बेकाबू हैं, कर्फ्यूग्रस्त माहौल में भी हिंसक प्रदर्शन जारी है और ऐसे माहौल में वारासिवनी तहसील के 13 श्रद्धालु नागरिक फंसे थे और ऐसी स्थिति में नागरिकों की जानकारी मिलते ही सांसद भारती पारधी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय के माध्यम से उन्हें भारतीय सीमा के भीतर पहुंचाया जो उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है।

नेपाल में फंसे रहे वारासिवनी तहसील के 13 नागरिक– नेपाल की राजधानी काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ विराजमान है जहां बडी संख्या में भारतीय श्रद्धालु अटूट आस्था और विश्वास के साथ मनोकामना लिए उनके दर्शन करने पहुंचते हैं। इसी क्रम में 8 सितम्बर 2025 को बालाघाट जिले की वारासिवनी तहसील के पदमपुर, लडसडा, डोंगरमाली, लिंगमारा, दीनी के 13 नागरिक जो कि अपने वाहन एमपी 50 बीसी 1686 से नेपाल के पशुपतिनाथ भगवान शिवजी के दर्शन करने पहुंचे थे और 9 सितम्बर को दर्शन के उपरांत उन्हें ज्ञात हुआ कि काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन से हालात बेकाबू हो गए हैं, जब वे अपने वाहन से भारतीय सीमा की ओर आने के लिए निकले तो नेपाली सेना ने उन्हें रक्सौल बार्डर पर ही रोक दिया और आगे बढने नहीं दिया। तब उन्होंने ऐसे मुश्किल हालात में भाजयुमो ग्रामीण मंडल अध्यक्ष सतीश लिल्हारे के माध्यम से सांसद भारती पारधी से सम्पर्क साधा और सांसद ने विदेश मंत्रालय एवं नेपाल के भारतीय दूतावास से त्वरित कार्यवाही कराकर उन्हें 10 सितम्बर 2025 को सुनौली बार्डर पहुंचवाया जहां से वे भारत की सीमा के भीतर पहुंचे।

वारासिवनी के यात्रियों में डोंगरमाली से मनोज लिल्हारे, आनंद बनोटे, सुरेश अनकर, रमेश पटले, हेमराज लिल्हारे, पदमपुर से राजेन्द्र ठकरेले, लिंगमारा के किरेन्द्र डोहरे, संजय धुवारे, सुरेश कटरे, इंद्रकुमार ब्रम्हे, विनय कुमार, लखन डोहरे एवं ग्राम दीनी के दीवान हटवार शामिल हैं। जिन्होंने नेपाल से भारतीय सीमा में पहुंचने पर सांसद भारती पारधी का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सांसद श्रीमती भारती पारधी के गंभीरता के साथ किए गए त्वरित प्रयास से ऐसे हालातों में ही हम यहां तक पहुंच पाये नहीं तो नेपाल के हिंसक हालातों से बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

विषम परिस्थिति में सांसद ने की मददः सरपंच मनोज लिल्हारे– वारासिवनी तहसील से नेपाल के काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन को गये यात्रियों में शामिल डोंगरमाली सरपंच मनोज लिल्हारे ने कहा कि 8 सितम्बर 2025 को सभी श्रद्धालु काठमांडू पहुंचे थे और मनोकामना देवी के दर्शन के बाद 9 सितम्बर की सुबह भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए। जिसके बाद जब अपने ठहरने के स्थान पर पहुंचे तो ज्ञात हुआ कि सारा काठमांडू जल उठा है और 9 सितम्बर की रात जैसे-तैसे लॉज में बिताई और 10 सितम्बर की सुबह जब भारतीय सीमा पर पहुंचने अपने वाहन से निकले तो सेना ने आगे जाने से रोक दिया। जिस स्थान पर रोका गया था वहां से कुछ ही दूरी पर प्रदर्शन हो रहा था, तभी यात्री उसी गेट पर पहुंचे जहां से वे नेपाल के भीतर आए थे। लेकिन नेपाली सेना ने भारत से 53 किलोमीटर पहले उन्हें हथौडा शहर में रोक लिया जहां बहुत भयभीत करने वाला माहौल था और वहां 4 घंटे बिताए और फिर भाजपा कार्यकर्ता के माध्यम से सांसद भारती पारधी से सम्पर्क कर सम्पूर्ण हालातों की जानकारी दी। तब सांसद ने भारतीय दूतावास से मदद करवाकर हमें सुनौली बार्डर पर पहुंचवाया और लगातार फोन से सम्पर्क में बनी रही और वहां से बकायदा दस्तावेजी अनुमति दिलाने के बाद हमें भारतीय सीमा में पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरपंच मनोज लिल्हारे ने कहा कि हम सभी भारत सकुशल पहुंचे और इस बात के लिए सांसद भारती पारधी को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने ऐसी विषम परिस्थिति में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए साथ दिया।

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