मदन महल दरगाह में कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन

जबलपुर दर्पण । मदन महल पहाड़ी स्थित हज़रत पीराने पीर की दरगाह में शुक्रवार को कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन अकीदत और रूहानियत से सराबोर माहौल में संपन्न हुआ। नमाज़-ए-जुमा के बाद आयोजित महफिल-ए-समा की सरपरस्ती मुतवल्ली सैय्यद कादिर अली कादरी व सदारत सज्जादानशीन सूफ़ी मुबारक कादरी ने फरमाई। महफिल का आगाज़ दरबारी क़व्वाल मोहित सुल्तानी, आज़ाद और जमी़ल बनारसी ने “कौल” से किया। इसके बाद हज़रत अमीर खुसरो का मशहूर सूफियाना कलाम “आज रंग है ऐ माँ रंग है री, मेरे महबूब के घर रंग है” पेश किया गया, जिससे दरगाह का पूरा माहौल रूहानी कैफियत से भर उठा। महफिल के अंत में जब क़व्वालों ने “छुटता है दयारे गौस ये कैसी घड़ी आई, रोते हैं जिगर और दिल अब जान पे बन आई” पढ़ा, तो समाईन की आँखें नम हो उठीं और पूरा माहौल उर्स की विदाई पर गमगीन हो गया। इस मौके पर सूफ़ी चंगेज़ ख़ान अशरफ़ी, सूफ़ी हकीम बाबा, सूफ़ी सैय्यद असर अली चिश्ती, सूफ़ी नबल बाबा कादरी (सिवनी), डॉ. सैय्यद मक़बूल अली कादरी, सूफ़ी आरिफ (छिंदवाड़ा), गुड्डू कादरी (मुंबई) और राजा राम भाई (बिलासपुर) सहित सैकड़ों सूफ़ी हज़रात एवं हज़ारों अकीदतमंदों ने शिरकत की। महफिल के समापन पर सज्जादानशीन निज़ाम कादरी ने तमाम जायरीन के लिए दुआएँ कीं। उन्होंने हिंदुस्तान में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। कुल शरीफ की रस्म के बाद लंगर तक़सीम किया गया! अंत में सज्जादानशीन इनायत कादरी ने उर्स शरीफ में शामिल सभी जायरीन और सूफ़ी हज़रात का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने उर्स के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और मीडिया प्रतिनिधियों का विशेष आभार व्यक्त किया।



